राजस्थान होमस्टे (पेईंग गेस्ट हाउस) योजना-2026 जयपुर (ईएमएस)। भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र अतिथि देवो भव की भावना को आधुनिक स्वरूप देते हुए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और अभिनव पहल की है। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग के संकल्प के साथ प्रदेश में राजस्थान होमस्टे (पेईंग गेस्ट हाउस) योजना 2026Ó को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। यह योजना न केवल राजस्थान की पारंपरिक मेहमाननवाजी को वैश्विक मंच प्रदान करेगी, बल्कि ग्रामीण आय और स्वरोजगार के नए आयाम भी स्थापित करने वाला एक सशक्त कदम साबित हो रही है। इस योजना को केन्द्र सरकार के डीरेगुलेशन 2.0 उपायों और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस की भावना के अनुरूप सरलीकृत किया गया है। यह योजना राज्य में पर्यटन गतिविधियों को विकेन्द्रीकृत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने तथा छोटे स्तर के उद्यम को बढ़ावा देना है। योजना में लाइसेंस प्रक्रिया को कम कर, मंजूरी को डिजिटल व तेज बनाया गया है। पहले जहां होम स्टे शुरू करने के लिए कई विभागों की अनुमति और अधिक कागजी कार्यवाही करनी पड़ती थी, अब सिंगल-विंडो सिस्टम, कम दस्तावेज और आसान रजिस्ट्रेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। राज्य में होमस्टे खोलना पहले की तुलना में अब अधिक सरल, तेज़ और किफ़ायती होगा, इस योजना के तहत राज्य के निवासी अपने घर या संपत्ति के कुछ कमरों को पर्यटकों के ठहरने हेतु उपलब्ध करा सकते हैं। अब गृहस्वामी होमस्टे इकाइयां अधिक सहजता से खोल और संचालित कर सकेंगे, जिससे छोटे निवेशक, ग्रामीण परिवार और महिला उद्यमी भी पर्यटन से सीधे जुड़कर लाभ ले सकेंगे। इससे स्थानीय लोगों को आय का स्रोत मिलेगा और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी मिलेगा। राजस्थान होमस्टे (पेईंग गेस्ट हाउस) योजना–2026Ó के तहत प्रति आवासीय इकाई अनुमत कमरों की अधिकतम संख्या 5 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है जबकि अधिकतम बैड क्षमता 24 निर्धारित की गई है। इससे आवास क्षमता बढ़ेगी लेकिन होमस्टे का पारिवारिक स्वरूप भी सुरक्षित रहेगा और छोटे उद्यमियों को भी पर्यटन व्यवसाय में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह योजना पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। पूर्व में लागू शर्त जिसके तहत संपत्ति स्वामी या परिवार का सदस्य उसी परिसर में निवास करेगा को इस योजना में समाप्त कर दिया गया है। अब होमस्टे इकाई का संचालन संपत्ति स्वामी, लीजधारी या निर्धारित मानकों के अनुसार नियुक्त केयरटेकर द्वारा किया जा सकेगा। यदि स्वामी या पट्टेदार स्वयं परिसर में निवास नहीं करता है, तो दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक नामित केयरटेकर नियुक्त किया जा सकेगा। इससे संचालन में लचीलापन और व्यावसायिक दक्षता दोनों सुनिश्चित होंगे। अशोक शर्मा/ 5 बजे/6 अप्रेल 2026