-ईरान डॉलर में नहीं करता खरीद-फरोख्त, इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम से है बाहर नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान से जंग कर अमेरिका ने वह दिन दिखा लिए जो उसने सपने में भी नहीं सोचा था, जिस देश के साथ कारोबार पर सात साल पहले अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था, उसके साथ खरीद-फरोख्त करने की छूट भी उसी ने दी। इस छूट का फायदा उठाते हुए भारत ने 7 साल बाद ईरान से लाखों बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इस खबर से देश के लोगों में जितनी खुशी है, उतने ही सवाल भी मन में उठ रहे हैं। जब ईरान डॉलर से भुगतान वाले सिस्टम में है ही नहीं, तो फिर भारत ने उसे पैसों का ट्रांसफर कैसे किया होगा। बता दें भारत ने मई 2019 के बाद अब साल 2026 में ईरान से तेल खरीदा है। ऐसा साल 2018 में अमेरिका की ओर से ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण हुआ था। हालांकि, इससे पहले भी ईरान के साथ खरीद-फरोख्त डॉलर में नहीं होता था। क्योंकि अमेरिका ने उसे काफी पहले ही इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम से बाहर कर दिया था। यही वजह है कि ईरान के साथ कारोबार के लिए कोई भी देश डॉलर में लेनदेन नहीं कर पाता है। अमेरिका ने भले ही ईरान को सिफ्ट से बाहर करके डॉलर में लेनदेन को रोक दिया था, लेकिन साल 2019 से पहले कारोबार के लिए भारत अपना खुद का पेमेंट सिस्टम बना लिया था। देश के पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी पिछले दिनों कहा था कि ईरान के क्रूड को खरीदने के लिए पेमेंट सिस्टम कोई बाधा नहीं बनेगी। सरकार ने ईरान के साथ लेनदेन के लिए वोस्ट्रो अकाउंट बनाए थे। इसी अकाउंट के जरिये सात साल पहले भी लेनदेन होता था और माना जा रहा है कि आज भी भारत ने इसी अकाउंट का इस्तेमाल ईरान से लेनदेन में किया है। ईरान के बैंकों और कंपनियों ने काफी पहले भारत के सरकारी बैंक यूको में अपने खाते खोले थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत इसी अकाउंट में ईरान से सामान खरीदने के बाद रुपए डालता था। बाद में ईरान इन रुपयों का इस्तेमाल भारत से चावल और अन्य चीजों को खरीदने में करता था। माना जा रहा है कि इस बार भी ईरान से तेल खरीदकर भारत इसी अकाउंट का इस्तेमाल भुगतान के लिए कर सकता है। कयास यह भी लगाए जा रहे कि इस बार गैर डॉलर वाले भुगतान के अन्य तरीके भी इस्तेमाल हो सकते है। इसमें लोकल करेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो डॉलर के बजाय किसी अन्य देश की करेंसी भी हो सकती है। सिराज/ईएमएस 06अप्रैल26