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06-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। यह प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था। इसमें 63 राज्यसभा सदस्यों समेत कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना था। सभापति ने प्रस्ताव के सभी पहलुओं का निष्पक्ष मूल्यांकन किया और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम की शक्ति का प्रयोग करते हुए इसे अस्वीकार कर दिया। अब मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल सुरक्षित है। 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव पर राज्यसभा के सभापति ने गंभीर विचार-विमर्श किया। सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के बाद, सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इसको स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस निर्णय के बाद साफ हो गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल जारी रहेगा और उनके खिलाफ महाभियोग की कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। ज्ञात रहे कि विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिया था। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव लाने की मांग की थी। विपक्ष ने उन पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया। उनके खिलाफ सात गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें दफ्तर में पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया, दुर्व्यवहार, चुनावी धोखाधड़ी और वोट देने का अधिकार छीनना जैसे आरोप थे। विपक्षी दलों ने विशेष रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न अभियान को लेकर सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि इस प्रक्रिया के कारण कई वोटरों का वोट देने का अधिकार छिन गया। इन आरोपों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया गया था।