क्षेत्रीय
07-Apr-2026
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इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की युगलपीठ ने शनिवार को कोर्ट छुट्टी होने के बावजूद एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई कर पुलिस को जमकर लताड़ लगा उसकी कार्रवाई को ही कटघरे में खड़ा कर आदेश दिया था कि करीब चालीस दिनों से गुमशुदा नाबालिग बालिका जो कि उसके पिता के आरोप अनुसार दंबग की कैद में है को सोमवार को कोर्ट में किसी भी हालत में प्रस्तुत करें। कोर्ट की इस फटकार के बाद पुलिस ने नाबालिग बालिका को दबंगों के पास से लाकर कल हाईकोर्ट में पेश किया। जहां कोर्ट के समक्ष नाबालिग ने पिता के साथ जाने का बयान दिया तो कोर्ट ने पिता को उसकी कस्टडी सौंप दी। नाबालिग के पिता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट शुभम मांडिल के अनुसार महू तहसील के एक गांव में रहने वाले पिता द्वारा हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप था कि उनकी 17 साल 3 माह की बालिका को 23 फरवरी को गांव का पवन सिंह उठाकर ले गया है। उनकी शिकायत पर पुलिस ने एफआइआर में पवन का नाम लिखने की जगह अज्ञात व्यक्ति द्वारा अपहरण करना दर्ज किया वहीं पुलिस द्वारा बालिका की तलाश भी नहीं की। याचिका के विषय की गंभीरता को समझते कोर्ट ने शनिवार को छुट्टी के बावजूद सुनवाई कर नामजद एफआइआर नहीं करने को लेकर पुलिस को फटकार लगाई और बालिका को सोमवार को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था। इस पर पुलिस ने नाबालिग को पवन की अवैध हिरासत से लाकर बालिका को हाईकोर्ट में पेश किया। जहां उसके बयान और मंशा पर कोर्ट ने उसे उसके पिता को सौंप दिया। - आनंद पुरोहित/ 07 अप्रैल 2026