- 50 लाख करोड़ निवेश से बदलेगी राज्य की तस्वीर- जद (यू) पटना, (ईएमएस)। जद (यू) के प्रदेश प्रवक्ता हिमराज राम एवं प्रदेश प्रवक्ता परिमल कुमार ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व और सुशासन की नीति के चलते बिहार अब देश के उभरते हुए औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उद्योग विभाग द्वारा अगले पाँच वर्षों में 50 लाख करोड़़ रुपये के निवेश और 1 करोड़ युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने का जो महा-संकल्प लिया गया है, वह बिहार के आर्थिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। यह लक्ष्य केवल एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं, किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य का ठोस रोडमैप है। राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से तय किया है कि हर वर्ष 10 लाख करोड़़ रुपये के निवेश को आकर्षित कर नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। यह पहल बिहार से होने वाले पलायन को रोकने, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन करने और गांव-गांव तक आर्थिक समृद्धि पहुंचाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उद्योगों की स्थापना को लेकर उद्योग विभाग द्वारा 13 हजार 343 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे बड़े, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार हो सके। इसके साथ ही सरकार ने उद्योग और व्यापार के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब व्यापारियों और उद्यमियों पर सीधे आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की बजाय नोटिस, सुधार और जुर्माने की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह बदलाव बिहार में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को नई ऊंचाई देगा और निवेशकों के विश्वास को और मजबूत करेगा। राज्य सरकार देश और विदेश के निवेशकों को बिहार की संभावनाओं से जोड़ने के लिए लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में देश एवं विदेशों के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में भी निवेशक सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह स्पष्ट संकेत है कि बिहार अब निवेशकों के लिए भरोसेमंद, संभावनाशील और तेजी से विकसित होता हुआ गंतव्य बन चुका है। राज्य सरकार की यह औद्योगिक नीति आम आदमी के जीवन में सीधे परिवर्तन लाने वाली है। जिससे 1 करोड़ युवाओं के लिए नौकरी और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। निवेश के मोर्चे पर बिहार ने पहले ही उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2024 में 1.80 लाख करोड़़ रुपये के निवेश से जुडे़ एमओयू हुए, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि बिहार में निवेश केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर तेजी से उतर रहा है। यह उपलब्धि उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो बिहार की क्षमता पर संदेह करते रहे हैं। संतोष झा-०७ अप्रैल/२०२६/ईएमएस