राष्ट्रीय
08-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच करीब 40 दिनों से जारी तनाव के बाद युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा कर दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर का ऐलान किया है। इस बीच भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी टिप्पणी करते हुए विभिन्न देशों की भूमिका पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि “ईरान को अपना पक्ष रखने का मौका मिला, अमेरिका ने अपनी इज्जत बचा ली, इजरायल को हकीकत का सामना करना पड़ा, पाकिस्तान को थैंक्यू नोट मिला और भारत को उसका तेल मिल गया। दुनिया को अस्थायी रूप से ही सही, शांति मिल गई।” प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के जरिए यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में भारत की भूमिका को लेकर हो रही आलोचना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्ध भारत का नहीं था, इसलिए भारत की सीधी भागीदारी की अपेक्षा करना तर्कसंगत नहीं है। शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका ने पाकिस्तान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह सीजफायर उसके लिए “एक ऐसे दलाल” की तरह है, जो पैसे लेकर संकट का समाधान करने का दावा करता है। यह टिप्पणी उन्होंने भारत के विदेश मंत्री के उस बयान के संदर्भ में की, जो सर्वदलीय बैठक में दिया गया था। वहीं, युद्धविराम को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इसमें भविष्य में हमले न करने, लेबनान पर कार्रवाई रोकने और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसी शर्तें शामिल हैं। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान के पावर प्लांट, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना नहीं बनाएगा। सूत्रों के मुताबिक, मध्य पूर्व में स्थिरता कायम करने के लिए 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बैठक भी प्रस्तावित है। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस वार्ता और सीजफायर की स्थिरता पर टिकी हुई है। हिदायत/ईएमएस 08अप्रैल26