बुसेल्स(ईएमएस)। भारत के भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को वापस लाने की दिशा में भारतीय जांच एजेंसियों को एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी सफलता मिली है। बेल्जियम की एंटवर्प अपीलीय अदालत ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं। अदालत के चैंबर ऑफ एक्यूजेशन ने बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में चोकसी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसे गंभीर आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना है। हालांकि, सबूत नष्ट करने के आरोप को तकनीकी आधार पर हटा दिया गया है क्योंकि यह बेल्जियम के स्थानीय कानूनों के दायरे में नहीं आता। अदालत ने चोकसी के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने खुद को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बताया था। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला किसी भी तरह से राजनीतिक, सैन्य या कर संबंधी विवादों से प्रेरित नहीं है, इसलिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पर कोई कानूनी रोक नहीं लगाई जा सकती। साथ ही, साल 2021 में एंटीगुआ से कथित तौर पर अगवा किए जाने के आरोपों पर अदालत ने कहा कि भारतीय सरकार की इसमें सीधी भूमिका का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। अदालत ने भारत की न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए यह भी माना कि वहां चोकसी को निष्पक्ष सुनवाई का पूरा अवसर मिलेगा और उसके साथ किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार होने की आशंका निराधार है। 65 वर्षीय मेहुल चोकसी, जिस पर 13,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का आरोप है, पिछले साल 11 अप्रैल से एंटवर्प की जेल में बंद है। भारत सरकार ने बेल्जियम को आश्वस्त किया है कि प्रत्यर्पण के बाद उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जहाँ उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सभी बुनियादी सुविधाएं, जैसे चिकित्सा सहायता, स्वच्छ भोजन और निजी डॉक्टर से परामर्श की सुविधा प्रदान की जाएगी। हालांकि चोकसी ने बचने के लिए बेल्जियम में शरण के लिए आवेदन किया है, लेकिन अदालत की इस सकारात्मक सलाह के बाद अब अंतिम निर्णय बेल्जियम की न्याय मंत्री को लेना है। यदि मंत्रालय की मुहर लग जाती है, तो चोकसी को भारत लाकर कानूनी कार्यवाही का सामना करने के लिए मजबूर किया जा सकेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/08अप्रैल2026