राज्य
08-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। एनजीटी ने दिल्ली में पानी की चोरी और अवैध दोहन रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। अब दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत चलने वाले सभी पानी के टैंकरों पर जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा चाहे वे जमीन का पानी ढो रहे हों या एसटीपी का साफ किया हुआ पानी। एनजीटी ने टैंकरों को किसी भी तरह की छूट देने से मना कर दिया है ताकि एसटीपी के पानी की आड़ में भू-जल की अवैध सप्लाई ना हो सके। टैंकर चालकों को जांच के दौरान गेट पास और जरूरी दस्तावेज दिखाना होगा। नियमों के उल्लंघन पर टैंकर जब्त किए जा सकते हैं और मालिकों चालकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी ने प्रशासन को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। एनजीटी ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी पानी के टैंकरों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इसका पूरा रिकॉर्ड भी रखा जाए। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि यह नियम भू-जल ले जाने वाले या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का शुद्ध पानी ढोने वाले सभी तरह के टैंकरों पर लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान टैंकर चालकों को संबंधित दस्तावेज दिखाना भी जरूरी होगा। दरअसल, कुछ पक्षों ने मांग की थी कि एसटीपी के साफ पानी की आपूर्ति करने वाले टैंकरों को इस नियम से छूट दी जाए, लेकिन एनजीटी ने इसे खारिज कर दिया। एनजीटी का कहना है कि भले ही एसटीपी का पानी पर्यावरण के लिए उपयोगी है और उसके पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन निगरानी के बिना इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। बिना जीपीएस के कुछ लोग एसटीपी के पानी के नाम पर अवैध रूप से भू-जल की आपूर्ति कर सकते हैं। इससे पहले 28 मई 2025 के आदेश में भी एनजीटी ने व्यावसायिक रूप से पानी की आपूर्ति करने वाले सभी टैंकरों में जीपीएस लगाने और अवैध भू-जल दोहन पर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाल ही के आदेश में इन निर्देशों को अधिक स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/08/ अप्रैल /2026