-ट्रंप गुस्से में बोले- हम अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए भारी संसाधन लगा रहे वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका का समर्थन न करने के लिए अपने पारंपरिक सहयोगियों पर हमला बोला। जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया पर ट्रंप ने जिस तरह से गुस्सा निकाला, उससे लगता है कि ट्रंप ईरान युद्ध में बुरी तरह से फंस गए हैं और पुराने मित्र देश उनकी मदद को आगे नहीं आ रहे। ट्रंप ने खुले तौर पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में अहम साझेदार अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया ने हमारी मदद नहीं की और जब बात नाटो की आती है, तो नाटो ने भी हमारी कोई मदद नहीं की। विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए भारी संसाधन लगा रहा है। ट्रंप के मुताबिक उत्तर कोरिया से बचाने के लिए हमारे 50,000 सैनिक जापान में तैनात हैं और किम जोंग उन से सुरक्षा के लिए 45,000 सैनिक दक्षिण कोरिया में तैनात हैं। जहां एक तरफ पश्चिमी और एशियाई सहयोगियों की आलोचना हुई, वहीं ट्रंप ने संघर्ष क्षेत्र के करीब स्थित खाड़ी देशों की उनके सहयोग के लिए जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब का प्रदर्शन शानदार रहा है। कतर ने बेहतरीन काम किया है। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत का रुख भी बहुत अच्छा रहा। नाटो के साथ चल रहे तनाव पर बात करते हुए ट्रंप ने इसके पीछे ग्रीनलैंड विवाद को मुख्य वजह बताया। उन्होंने कहा कि अगर आप सच जानना चाहते हैं, तो यह सब ग्रीनलैंड से शुरू हुआ। हमें ग्रीनलैंड चाहिए था, लेकिन वे हमें देना नहीं चाहते। इस पर मैंने कहा बाय-बाय। ट्रंप ने नाटो को कागज का शेर करार देते हुए इस गठबंधन की प्रासंगिकता को ही खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि हमें स्पष्ट रूप से उनकी जरूरत नहीं थी, क्योंकि उन्होंने हमारी बिल्कुल भी मदद नहीं की है। रिपोर्ट के मुताबिक एक और उदाहरण पिछले महीने इटली में देखने को मिला। इतालवी सरकार ने कथित तौर पर मध्य पूर्व जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को सिसिली स्थित सिगोनेला एयर बेस पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण थे। पहला- इटली इस संघर्ष में सीधे तौर पर उलझने से बचना चाहता था। दूसरा- इतालवी धरती पर अमेरिकी अभियानों के लिए मौजूद समझौतों के तहत वाशिंगटन ने इस उड़ान के लिए न तो कोई पूर्व अनुमति ली थी और न ही इटली के सैन्य नेतृत्व से कोई परामर्श किया था। सिराज/ईएमएस 09 अप्रैल 2026