वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान में होने वाली प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले सुरक्षा चिंताओं ने दुनिया का ध्यान खींचा है। व्हाइट हाउस के पूर्व प्रेस सचिव एरी फ्लेशर ने एक गंभीर बयान जारी करते हुए अमेरिकी वार्ताकारों, विशेषकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। फ्लेशर ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा स्थिति को अस्थिर और खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है कि वहां की सरकार का अपने ही कई क्षेत्रों पर पूर्ण नियंत्रण नहीं है, जिससे अमेरिकी अधिकारियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। फ्लेशर ने इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान की उच्च स्तरीय यात्राएं हमेशा से ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बुरा सपना रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश की यात्राओं के दौरान भी सीक्रेट सर्विस को असाधारण और गोपनीय कदम उठाने पड़े थे, जिसमें चकमा देने वाले विमानों का उपयोग शामिल था। एरी फ्लेशर के अनुसार, पाकिस्तान जैसे देश में जहां कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता अधिक है, वहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति की मौजूदगी किसी बड़ी सुरक्षा चुनौती से कम नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वार्ताकारों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना करने तक की अपील कर दी है। कूटनीतिक स्तर पर भी यह वार्ता चुनौतियों से घिरी हुई है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच एक अल्पकालिक युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसे स्थायी रूप देने के लिए इस्लामाबाद को चुना गया। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने वार्ता शुरू होने से पहले ही कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान का आरोप है कि लेबनान पर इजरायल के हालिया हमले युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन हैं। तेहरान ने साफ कर दिया है कि यदि ये हमले नहीं रुकते हैं, तो पाकिस्तान में होने वाली चर्चा का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। पाकिस्तान सरकार ने इस महत्वपूर्ण बैठक की सुरक्षा के लिए राजधानी को पूरी तरह से एक सुरक्षित किले (छावनी) में तब्दील कर दिया है। हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है और हवाई क्षेत्र की निगरानी बढ़ाई गई है। इस वार्ता के परिणाम न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की शांति को प्रभावित करेंगे। दुनिया भर के विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि सुरक्षा और कूटनीति के इन कठिन अवरोधों के बीच यह बातचीत सफल होती है, तो यह वैश्विक राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/10अप्रैल2026