- अवैध मुरूम खनन पर उठे सवाल, प्रशासनिक कार्रवाई पर ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ी खैरागढ़-छुईखदान-गंडई(ईएमएस)। जिले के ग्राम दामरी में कथित अवैध मुरूम खनन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से सरकारी और निजी जमीनों पर बिना रोक-टोक खुदाई और परिवहन का काम जारी है, जबकि जिम्मेदार विभाग की मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई देती है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात जेसीबी मशीनों की आवाज और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही अब आम बात हो गई है, लेकिन शिकायतों के बावजूद मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे लोगों में यह आशंका भी गहराने लगी है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत के चलते अवैध खनन को संरक्षण मिल रहा है। इसी बीच विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों और जमीनी स्थिति को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। सदन में दिए गए जवाब में जिले में रेत के अवैध उत्खनन का एक भी मामला दर्ज नहीं होने की जानकारी दी गई, जबकि मुरूम से जुड़े केवल दो प्रकरण बताए गए हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर दामरी के अलावा साल्हेवारा, बुंदेली और सोनभट्टा जैसे क्षेत्रों से लगातार अवैध खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। खनन विभाग के खर्च को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में विभाग ने कुल 62,93,807 रुपये खर्च किए हैं। इसमें वेतन, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, कार्यालय व्यय, पेट्रोल-डीजल, सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न मदों में राशि शामिल है। इसके बावजूद अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। जिले में 229 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में खनन लीज स्वीकृत होने और वर्ष 2023 से 2026 के बीच 53 प्रकरण दर्ज होने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका असर न दिखने पर निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले पर सहायक खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने बताया कि दामरी क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायत मिलने पर टीम को मौके पर भेजा गया था, लेकिन वहां कोई वाहन या गतिविधि नहीं मिली। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी तरह की पुख्ता जानकारी या वाहन पकड़े जाएंगे, नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल लगातार शिकायतों और कार्रवाई के अभाव से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों ने कलेक्टर और उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस कथित “कागजों में जीरो और जमीन पर जारी खनन” के अंतर को कैसे नियंत्रित करता है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)10 अप्रैल 2026