* आरएजी आधारित तकनीक से लैस सिस्टम देगा रियल-टाइम कानूनी सलाह, एनडीपीएस मामलों में बढ़ेगी सजा दर गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात में नार्कोटिक्स से जुड़े अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करते हुए गुजरात पुलिस ने ‘NARIT AI-नारिट एआई’ (नशीली दवाओं के विश्लेषण और आरएजी-आधारित जांच उपकरण) नामक एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच को अधिक प्रभावी बनाना और अदालत में मामलों को मजबूत बनाकर दोषियों को सजा दिलाना है। यह टूल पुनर्प्राप्ति संवर्धित पीढ़ी (आरएजी) तकनीक पर आधारित है, जो एनडीपीएस कानून के तहत आने वाले जटिल मामलों में जांच अधिकारियों को सटीक मार्गदर्शन प्रदान करता है। खास बात यह है कि यह सिस्टम कानूनी प्रावधानों, नियमों और जांच प्रक्रियाओं को एकत्रित कर रियल-टाइम विश्लेषण और कानूनी सलाह देता है। भारत में किसी भी राज्य पुलिस द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला यह अपनी तरह का पहला एआई टूल है। इस एप्लिकेशन को पश्चिम रेलवे पुलिस, वडोदरा डिवीजन ने मुंबई स्थित एक एआई स्टार्टअप के सहयोग से विकसित किया है। इसे गुजरात के डीजीपी के.एल.एन. राव और सूरत पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, जबकि इसकी पहल पश्चिम रेलवे, वडोदरा के एसपी अभय सोनी द्वारा की गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में राज्य सरकार ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। हर्ष संघवी ने कहा कि ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाने को तैयार है और तकनीक के जरिए इस अभियान को और मजबूत बनाया जाएगा। * जांच अधिकारियों को कैसे मदद करेगा? इस टूल का उपयोग करने के लिए सबसे पहले पुलिस अधिकारी को एफआईआर अपलोड करनी होगी। इसके बाद सिस्टम स्वतः केस का विश्लेषण कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट में केस की ताकत और कमजोरियों का मूल्यांकन, कानूनी सुझाव, जरूरी प्रक्रिया और साक्ष्यों की चेकलिस्ट शामिल होगी। यह टूल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों के आधार पर जांच अधिकारियों को यह भी बताएगा कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इससे जांच में होने वाली प्रक्रियात्मक गलतियों को रोका जा सकेगा। * एआई सिस्टम की खासियत क्या है? यह एआई सिस्टम एफआईआर को इनपुट के रूप में लेकर उसका गहन विश्लेषण करता है और रिपोर्ट तैयार करता है। यह एनडीपीएस एक्ट 1985, बीएनएस, बीएनएसएस, बीएसए जैसे कानूनों, सरकारी गाइडलाइंस और कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित है। आरएजी तकनीक के कारण यह सिस्टम केवल अपने डेटाबेस पर निर्भर करता है और इंटरनेट सर्च का उपयोग नहीं करता, जिससे गलत जानकारी (हेल्यूसिनेशन) की संभावना बेहद कम हो जाती है। यह एप्लिकेशन गुजरात हाई कोर्ट की एआई गाइडलाइंस का पालन करता है और एक निजी एआई सिस्टम के रूप में केवल गुजरात पुलिस के लिए उपलब्ध है। * कोर्ट ट्रायल में भी देगा समर्थन यह टूल सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालत में संभावित बचाव पक्ष की दलीलों का पूर्वानुमान लगाकर उनके जवाब भी सुझाता है। इससे अभियोजन पक्ष को केस मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और एनडीपीएस मामलों में दोष सिद्ध होने की दर बढ़ने की उम्मीद है। यह पहल न केवल तकनीक और कानून के संगम का उदाहरण है, बल्कि भविष्य में पुलिस जांच के तरीके को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है। सतीश/10 अप्रैल