राष्ट्रीय
10-Apr-2026


-कंज्यूमर कमीशन ने रियलमी कंपनी पर लगाया 1.5 लाख रुपये का जुर्माना नई दिल्ली,(ईएमएस)। राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में एक दर्दनाक घटना में मोबाइल फोन फटने के कारण एक यूपीएससी अभ्यर्थी अपनी परीक्षा नहीं दे सका। करीब साढ़े तीन साल बाद इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मोबाइल कंपनी रियलमी को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी ठहराया और जुर्माना लगाया है। मामला वर्ष 2022 का है, जब यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा से ठीक एक दिन पहले अभ्यर्थी कोटी साईं पवन का मोबाइल फोन अचानक फट गया। यह फोन रियलमी 10टी मॉडल का था, जिसे उसने 2019 में करीब 18 हजार रुपये में खरीदा था। घटना तड़के करीब 3 बजे हुई, जब फोन उसके सिरहाने रखा था। धमाके के बाद फोन में आग लग गई, जिससे पवन के हाथ, उंगलियां और माथा झुलस गए। घटना के बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिसके चलते वह अगले दिन होने वाली यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सका। इस हादसे ने न सिर्फ उसकी एक साल की मेहनत पर पानी फेर दिया, बल्कि उसके करियर को भी पीछे धकेल दिया। पवन ने आयोग को बताया कि उसके पिता की जीवन भर की जमा-पूंजी से भरी गई कोचिंग फीस भी इस घटना के कारण बेकार हो गई। न्याय के लिए पवन ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए मध्य जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल शामिल थीं, ने कंपनी के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मोबाइल की बैटरी में विस्फोट होना बेहद गंभीर सुरक्षा चूक है, जिससे किसी की जान भी जा सकती थी। साथ ही आयोग ने यह भी पाया कि जब पीड़ित कंपनी के सर्विस सेंटर पहुंचा, तो उससे एक ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला गया, जिसमें दुर्घटना की जिम्मेदारी उसी पर डाली जा रही थी। इनकार करने पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और फोन लौटाने से भी मना कर दिया गया। आयोग ने इसे कंपनी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए पवन को कुल 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसमें एक लाख रुपये शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए, 25 हजार रुपये हर्जाने के रूप में और 25 हजार रुपये कानूनी खर्च के लिए शामिल हैं। इसके साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि यह राशि 1 अक्टूबर 2022 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा की जाए। यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी जाएगी। हिदायत/ईएमएस 10मार्च26