कांग्रेस नेता का तंज.........30 महीनों बाद पीएम मोदी ने अपना मन बदला नई दिल्ली,(ईएमएस)। महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश सियासत चरम पर है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया लेख पर कड़ी प्रतिक्रिया देकर चुनावी हथकंडा बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं का समर्थन पाने प्रधानमंत्री मोदी ने मुद्दे पर यू-टर्न लिया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस नेता रमेश ने पोस्ट किया, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के एकमात्र चैंपियन के रूप में दिखाने मीडिया में लेख लिखना शुरू किया है। दरअसल, उन्हें भारत की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को तब संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था, तब कांग्रेस ने बिल को 2024 से ही लागू करने की मांग की थी, लेकिन यह प्रधानमंत्री मोदी को स्वीकार्य नहीं था। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की कवायद पर निर्भर बनाया था, इस काम को कराने में विफल रहे और फिर कई वर्षों तक टालते रहे। कांग्रेस नेता रमेश ने दावा किया, ‘‘अब जब निर्वाचन आयोग के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय के रूप में कार्य करने के बावजूद विधानसभा चुनावों में (भाजपा की) हार तय दिख रही है, तब 30 महीनों बाद पीएम मोदी ने अपना मन बदल दिया है। वे चाहते हैं कि हम जनगणना को भूल जाएं और जनगणना आधारित परिसीमन को आधार पर भूल जाएं कि इसमें बहुत लंबा समय लगेगा।’’ उन्होंने कहा कि यह तथ्य के बावजूद है कि उनके जनगणना पंजीयक ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के परिणाम 2027 तक सामने आ जाएंगे। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह एक कहानी है जो झूठ और गोलमोल बातों पर आधारित है। यह सब उम्मीद से किया गया है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाएं भाजपा का समर्थन करेंगी। आख़िरकार, भाजपा के पास इन राज्यों में किसी अन्य मुद्दे पर कोई सार्थक विमर्श नहीं है।’’ दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। पीएम मोदी ने सभी सांसदों से इस कदम का समर्थन करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा था कि यह कदम उस सिद्धांत की पुष्टि है जिसमें लंबे समय से भारत की सभ्यतागत विचारधारा का मार्गदर्शन किया है कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं। आशीष दुबे / 10 अप्रैल 2026