राज्य
10-Apr-2026
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- इको-सेंसिटिव जोन को बचाने के लिए प्रशासन का बड़ा अभियान - भारी पुलिस बल तैनात रहा और कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से - 21 अप्रैल तक चलेगी कार्रवाई भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर प्रशासन सख्त कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है। शहर के ऐतिहासिक बड़ा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया गया है। कोर्ट के निर्देशों के बाद तालाब के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर के दायरे में बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई का उद्देश्य तालाब के इको-सेंसिटिव जोन को सुरक्षित रखना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। जिला प्रशासन ने 6 अप्रैल से 21 अप्रैल तक 15 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया है। इस दौरान बड़ा तालाब के आसपास चिन्हित 347 अवैध अतिक्रमणों को हटाने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 16 मार्च 2022 को लागू भोज वेटलैंड नियमों के बाद बने सभी निर्माण अवैध माने जाएंगे और उन पर सख्ती से कार्रवाई होगी। पिछले दो महीने से जिला प्रशासन अतिक्रमण को चिह्निंत कर रहा था। अभियान की शुरुआत शुक्रवार को हलालपुरा क्षेत्र से की गई। बैरागढ़ तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और जेसीबी की मदद से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। तालाब किनारे बने एक फार्महाउस और अन्य निर्माणों को निशाने पर लिया गया। इस दौरान 4 से 5 अतिक्रमण हटाए गए। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की गई। चार दिन पहले भदभदा क्षेत्र में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। अब हलालपुरा के बाद बैरागढ़, सेवनिया गोंड, हुजूर और टीटी नगर क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से बुलडोजर अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए दिनवार शेड्यूल भी तय किया है, ताकि तय समय सीमा में सभी अतिक्रमण हटाए जा सकें। - अब कहां और कब होगी कार्रवाई शुक्रवार को हलालपुरा के बाद 11 अप्रैल को बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे), 12 और 13 अप्रैल को सेवनिया गोंड, 15 और 16 अप्रैल को बैरागढ़, 17 अप्रैल को हुजूर तहसील, 18 और 19 अप्रैल को टीटी नगर, 20 अप्रैल को बैरागढ़ (शेष) और अंतिम चरण में 21 अप्रैल को हुजूर तहसील कार्रवाई होगी। -गांवों में सबसे ज्यादा अतिक्रमण प्रशासन की जांच में सामने आया है कि टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण हुए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा क्षेत्रों में भी तालाब किनारे बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए गए हैं। वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में भी सीमांकन के दौरान करीब 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने की बात सामने आई है, जिसे वेटलैंड नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। - अवैध निर्माण नहीं बचेंगे कुछ संपत्ति मालिकों ने नगर निगम में आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्रशासन का कहना है कि जिन मामलों में आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनकी सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। -एनजीटी तक पहुंच सकता है मामला पर्यावरणविदों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में उठाने की बात कही है। उनका मानना है कि बड़ा तालाब भोपाल की जीवनरेखा है और इसकी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है। -पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम प्रशासन का कहना है कि यह अभियान सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहर के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना है। बड़ा तालाब के संरक्षण के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।