खेल
11-Apr-2026
...


कर्ज में डूबे पिता, जेल काटी नई दिल्ली (ईएमएस)। 9 अप्रैल की रात कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ जब लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के 21 वर्षीय मुकुल चौधरी मैदान पर उतरे, तो वे सिर्फ गेंदबाजों का सामना नहीं कर रहे थे, बल्कि अपने परिवार की वर्षों की कठिनाइयों से भी लड़ रहे थे। राजस्थान के झुंझुनू जिले के खेदारो की धानी नामक एक छोटे से गांव से आने वाले मुकुल का सफर बेहद दर्द भरा रहा है। उनके पिता द्वारा घर बेचना, एक अच्छी क्रिकेट अकादमी की तलाश में भटकना, सूदखोरों का दबाव और उनके पिता का जेल जाना, ये सब उनके संघर्ष की कहानी का हिस्सा हैं। कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ 27 गेंदों में नाबाद 54 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर जब मुकुल डगआउट की ओर लौटे, तो राजस्थान में उनके पिता दलीप चौधरी की आंखें डबडबा गईं। मुकुल के जन्म से पहले ही उनके पिता दलीप ने ठान लिया था कि उनका बेटा क्रिकेटर बनेगा। 2003 में अपनी ग्रेजुएशन और शादी के बाद, दलीप ने फैसला किया कि अगर उन्हें बेटा हुआ, तो वे उसे क्रिकेटर बनाएंगे। उन्होंने खुद राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हुए, फिर रियल एस्टेट कारोबार में भी असफलता मिली। 2016 में, मुकुल के लिए एक अच्छी क्रिकेट अकादमी ढूंढते हुए, पिता-पुत्र 70 किलोमीटर दूर सीकर स्थित एसबीएस क्रिकेटहब पहुंचे। दलीप बताते हैं, जब मैंने उसका दाखिला कराया, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। नियमित आय न होने के कारण मैंने अपना घर 21 लाख रुपये में बेचने का फैसला किया। अगले साल मैंने एक होटल शुरू किया और एक और लोन ले लिया। मैं किश्तें समय पर चुकाने में असफल रहा और जेल भी गया, लेकिन मैंने कभी धोखाधड़ी नहीं की। इस दौरान रिश्तेदारों ने उन्हें पागल कहा और बेटे की जिंदगी न बर्बाद करने की सलाह दी, लेकिन इन कठोर शब्दों ने दलीप और उनके परिवार को और भी मजबूत बना दिया। जब एलएसजी ने नीलामी में मुकुल को उनके बेस प्राइस से 13 गुना अधिक 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा, तो मुकुल ने अपने पिता से वादा किया कि वह जल्द से जल्द उनके सारे लोन और कर्ज चुका देगा। मुकुल चौधरी, जिन्हें धोनी की तरह मैच खत्म करना पसंद है, ने कोलकाता में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से कहा, मुझे हमेशा धोनी का मैच खत्म करने का तरीका पसंद आया है। वह यॉर्कर पर भी छक्का मार सकते हैं। जब आप इस तरह की गेंद पर छक्का मार सकते हैं, तो गेंदबाज को अलग तरह से सोचना पड़ता है। मुकुल की यह कहानी उनके परिवार के अटूट विश्वास और अथक मेहनत का परिणाम है। डेविड/ईएमएस 11 अप्रैल 2026