अंतर्राष्ट्रीय
11-Apr-2026


बेरूत(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता की पृष्ठभूमि में लेबनान और इजरायल के राजदूतों के बीच पहली बार सीधा संपर्क स्थापित हुआ है। अमेरिका की मध्यस्थता में अमेरिका में लेबनानी दूत नदा हमादेह और इजरायली राजदूत येचिएल लेइटर ने फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत का उद्देश्य अगले हफ्ते होने वाली औपचारिक शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करना है। लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष 14 अप्रैल को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में पहली आधिकारिक बैठक करने पर सहमत हुए हैं। इस प्रस्तावित बैठक में युद्धविराम के ढांचे और भविष्य की शांति प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा किया जा रहा यह प्रयास व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है, ताकि क्षेत्र में जारी हिंसा को रोककर औपचारिक बातचीत शुरू की जा सके। हालांकि, कूटनीतिक मोर्चे पर हो रही इस प्रगति के बीच जमीनी हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। शनिवार को इजरायली सेना ने लेबनान की एक सरकारी इमारत को निशाना बनाया, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, हालिया हमलों में भारी तबाही हुई है और एक ही दिन में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। वहीं, इजरायल का दावा है कि उसने बेरूत में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान हिजबुल्लाह के प्रमुख सहयोगी अली यूसुफ हरशी को ढेर कर दिया है। इस तनावपूर्ण स्थिति में लेबनान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इजरायल के साथ सीधी बातचीत की मेज पर बैठने के लिए युद्धविराम पहली और अनिवार्य शर्त है। लेबनान का कहना है कि निरंतर हमलों के बीच किसी भी सार्थक वार्ता में शामिल होना संभव नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका इस समय इजरायल पर हमलों को रोकने के लिए भारी दबाव बना रहा है। इसका मुख्य कारण इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली वार्ता है। ईरान ने पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो वह अमेरिका के साथ शांति वार्ता से पीछे हट जाएगा। अमेरिका किसी भी कीमत पर इस वार्ता को बचाना चाहता है, ताकि क्षेत्र में एक बड़ी मानवीय त्रासदी और महायुद्ध को टाला जा सके। अब पूरी दुनिया की नजरें 14 अप्रैल को वॉशिंगटन में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/11अप्रैल2026 ---------------------------------