अमेरिकी सिक्योरिटी एनालिस्ट ने कहा- इससे भारत को कोई फर्क नहीं पड़ेगा इस्लामाबाद,(ईएमएस)। इस्लामाबाद की सड़कों पर बैनर लगे हुए हैं जिनमें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता के बारे में लिखा है। पीएम शहबाज शरीफ की सरकार इसे पाकिस्तान की डिप्लोमेसी के लिए बहुत बड़ा मौका मान रही हैं। पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स सोशल मीडिया पर इस शांति बातचीत को लेकर जश्न मना रहे हैं और भारत पर तंज कस रहे हैं जो उन्हें कई सालों के बाद मिला है। पाकिस्तान जो पिछले कम से कम 10 सालों से राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ चुका था उसके लिए अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता करवाना एक उपलब्धि है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हालांकि इस शांति वार्ता की कामयाबी पर शक है। ईरान के वार्ताकार आज अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। हालांकि तेहरान ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले कुछ शर्तें पूरी होनी चाहिए जिनमें लेबनान में युद्धविराम और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई शामिल है, लेकिन फिर भी बातचीत शुरू होने की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता है तो अमेरिका फिर हमला करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट के सिक्योरिटी एनालिस्ट का मानना है कि शांति वार्ता पाकिस्तान के लिए बड़ी बात हो सकती है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि मुझे ऐसा नहीं लगता कि भारत को कोई फर्क पड़ता है। पाकिस्तान इन वार्ताओं के लिए अच्छी स्थिति में है। उसके अमेरिका, सऊदी अरब और चीन के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और ईरान के साथ उसकी सीमा भी लगती है। पाकिस्तान इन वार्ताओं में बहुत बड़ा जोखिम उठा रहा है। उसके पास खोने के लिए बहुत कुछ है। अगर वह कोई समझौता करवाने में मदद करता है तो उसे वाइट हाउस के लिए अहम माना जाएगा और इस्लामी दुनिया में उसकी भूमिका और मजबूत होगी। वह पहले से ही ट्रंप प्रशासन के करीब था। इसके अलावा उन्होंने लिखा है कि अगर बातचीत विफल हो जाती है तो भी यही माना जाएगा कि पाकिस्तान ने प्रयास किया। उन्होंने लिखा है दूसरी तरफ भारत आईएमईसी और क्वाड में अपनी भूमिका निभाता रहेगा। अगर वह मेजबानी करता तो भी उसे न तो कुछ खोना पड़ता और न ही जरूरी तौर पर कुछ हासिल होता। इस्लामी दुनिया में पाकिस्तान की विश्वसनीयता है और यही उसका मुख्य आधार है। भारत के लिए इस मामले में जोखिम उठाने का कोई कारण नहीं था और यह तार्किक भी है कि वे इसमें शामिल नहीं हैं। सिराज/ईएमएस 11अप्रैल26 ----------------------------------