राष्ट्रीय
12-Apr-2026
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कोलकाता(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद और अभिनेत्री सायोनी घोष एक बार फिर बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर सायोनी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक सार्वजनिक मंच पर काबा इन माई हार्ट एंड मदीना इन माई आईज (मेरे दिल में काबा और मेरी आंखों में मदीना) गीत पर झूमती और गाती नजर आ रही हैं। इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाते हुए इसे बंगाल के हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करार दिया है। सायोनी घोष के लिए विवादों से नाता कोई नई बात नहीं है। भाजपा नेताओं ने इस वायरल वीडियो के साथ उनके उस पुराने विवादित ट्वीट को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें उन्होंने शिवलिंग को लेकर कथित तौर पर एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किया था। भाजपा समर्थकों का तर्क है कि जो नेता हिंदू आस्था के प्रतीकों का अपमान करती रही हैं, वह अब मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए मंचों से इस तरह के गीत गा रही हैं। इसे भाजपा ने बंगाल के हिंदुओं के आत्मसम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए अपना चुनावी नैरेटिव और तेज कर दिया है। दूसरी ओर, सायोनी घोष और टीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह गंगा-जमुनी तहजीब का हिस्सा है और भाजपा जानबूझकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए पुराने मामलों को तूल दे रही है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद टीएमसी के लिए उन क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है जहां हिंदू मतदाताओं की संख्या अधिक है। भाजपा ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताते हुए सोशल मीडिया पर एक व्यापक कैंपेन भी शुरू कर दिया है। सायोनी घोष, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाती हैं, इससे पहले जुलाई 2025 में संसद के भीतर ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा के दौरान अपने तीखे सवालों के लिए काफी चर्चा में रही थीं। तब उन्होंने आतंकी हमलों और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाकर सत्तापक्ष को घेरने की कोशिश की थी। अब 23 अप्रैल से शुरू होने वाले मतदान से ठीक पहले, सायोनी का यह ताजा विवाद बंगाल की चुनावी बिसात पर धार्मिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकता है। ममता बनर्जी की हिंदू-मुस्लिम संतुलन की नीति पर इस विवाद का क्या असर होगा, इसकी असल तस्वीर 4 मई को चुनावी नतीजों के साथ ही साफ हो पाएगी। फिलहाल, चुनाव की जंग में धार्मिक प्रतीकों और आस्था का शोर काफी बढ़ गया है। वीरेंद्र/ईएमएस/12अप्रैल2026 ---------------------------------