लेख
13-Apr-2026
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महज 36 साल की उम्र में नेपाल के प्रधानमंत्री बने बालेन शाह ने शपथ लेते ही जिस तरह से अपनी सक्रियता दिखाई है, उसको लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उनकी भारत में हो रही है। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में युवा लोगों को रखा है। नेपाल के पुराने धाकड़ राजनेता और राजवंश कहां चला गया, वह ढूंढने से भी नहीं मिल रहा है। बालेन शाह की कैबिनेट में शामिल सभी मंत्री उच्च शिक्षित और विशेषज्ञ हैं। मंत्रिमंडल की औसत आयु 38.21 वर्ष है। मंत्रिमंडल में 5 महिला मंत्रियों को स्थान दिया गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री की कैबिनेट पूरी तरह से जेन-जी आंदोलन से निकलकर सत्ता के सिंहासन तक पहुंची है। भारत सहित विश्व के अन्य देशों में जिस तरह से नेपाल सरकार की चर्चा हो रही है। सरकार जिस तरह से काम कर रही है। उसकी प्रशंसा इन दिनों सारी दुनिया के जेन-जी में देखने को मिल रही है। नेपाल में पहली बार पारंपरिक राजनीति से हटकर युवाओं ने अपनी सरकार बनाई है। सरकार को लेकर विशेषज्ञता और समर्पण को महत्व देते हुए जिस तरह से कार्य करना शुरू किया है, उससे आशा की एक नई किरण देखने को मिल रही है। शपथ लेने के दूसरे दिन ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भिजवा दिया। कठोर से कठोर निर्णय लेने में उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो रही है। विदेशों में नेताओं और अधिकारियों के जमा काले धन को नेपाल वापस लाने की कार्यवाही शुरू कर दी है। बिना किसी लाग लपेट के प्रधानमंत्री और कैबिनेट के सदस्य नेपाल स्थित विभिन्न देशों के दूतावास पहुंच रहे हैं। जहां पर वह नेपाल के नए विकास मॉडल को लेकर विभिन्न देशों के राजदूतों से चर्चा कर रहे हैँ। नेपाल की जरूरतों और विकास के लिए त्वरित निर्णय की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। नेपाल मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्री एक से एक बढ़कर एक हैँ। कोई टेक्नोलॉजी से है, कोई पूर्व मेयर और संगीतकार रह चुका है। 2 मंत्री पीएचडी होल्डर हैं। वित्त मंत्री डा स्वर्णिम अर्थशास्त्र से पीएचडी कर चुकी हैं। विदेश मंत्री शिशर खनाल जिनकी उम्र 47 साल की है वह अमेरिका से पब्लिक पॉलिसी और पॉलिटिकल इकोनॉमी में स्नातक हैं। नेपाल में पढ़े-लिखे लोगों का मंत्रिमंडल है। ऐसा मंत्रिमंडल दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में यह बिल्कुल अलग है। सबसे अच्छी बात यह है, सारे युवा मिलकर नेपाल को नई दिशा देने के लिए अपना अधिक से अधिक समय दे रहे हैं। इनकी ऊर्जा देखने लायक है। जिस तरह से यह सोच समझकर गंभीरता के साथ निर्णय ले रहे हैं। निश्चित रूप से उसके सुखद परिणाम कुछ ही महीनो में दिखना शुरू हो जाएंगे। 2 सप्ताह पुरानी सरकार 100 सूत्री शासन सुधार एजेंडा पेश कर चुकी है। इस एजेंडे पर काम भी शुरू कर दिया है। मंत्रालयों का पुनर्गठन, दक्षिण एशिया संघर्ष के प्रभाव, नेपाल के एनआईआर की सुरक्षा का कार्य, कार्की आयोग की रिपोर्ट पर कार्यवाही, संविधान संशोधन, पार्टी आधारित छात्र संघ व्यवस्था समाप्त करने, निजी अस्पतालों में 10 फीसदी मुफ्त बेड गरीबों के लिए। इस तरह स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिए जिस तरह से सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है, उसको देखते हुए, यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है, यदि यही उत्साह कुछ और समय तक बना रहता है तो आने वाले समय में नेपाल का भविष्य सारी दुनिया के लिए देखने योग्य होगा। नेपाल में अभी बहुत सारी चुनौतियां हैं। इसके बाद भी जिस तरह से नेपाल मंत्रिमंडल ने अपना एजेंडा लागू कर आम जनता को विश्वास में लिया वह महत्वपूर्ण बात है। नेपाल में सामाजिक, आर्थिक, न्याय, सुशासन, महंगाई और बेरोजगारी के क्षेत्र में जो प्रयास देखने को मिल रहे हैँ, निश्चित रूप से नेपाल युवा पीढ़ी उत्साह में पुरानी बीमारियों को त्याग कर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रही है। उससे लगता है, नेपाल एक नए वैश्विक स्वरूप में स्थापित होने की दिशा मे सफल होगा। जेन-जी ने जिस तरह से नेपाल की पुरानी सत्ता को उखाड़ कर नई सत्ता को स्थापित किया है, इस बात का असर कहीं ना कहीं अब भारत में भी दिखने लगा है। यहां का युवा भी बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य समस्याओं को लेकर उद्देलित है। भारत के लिए वर्तमान स्थिति में यह चिंताजनक है। भारत की संवैधानिक संस्थाओं को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। भारत की संवैधानिक संस्थाएं सरकार के इशारे पर काम करती हुई दिख रही हैं, जिससे युवाओं में रोष दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से सबक लेकर इस तरह की स्थितियां भारत में उत्पन्न ना हों, इसके लिए सभी संवैधानिक संस्थाओं को मिलकर आगे आना चाहिए। ईएमएस / 13 अप्रैल 26