क्षेत्रीय
13-Apr-2026
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रायपुर (ईएमएस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने इसे भाजपा की राजनीतिक मजबूरी करार देते हुए कहा कि महिला आरक्षण की मजबूत नींव कांग्रेस सरकारों ने रखी थी। वंदना राजपूत ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान कांग्रेस ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी इस मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसका भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने उस समय विरोध किया था। उनके अनुसार यह विधेयक आज भी राज्यसभा में जीवित है, क्योंकि वहां पारित विधेयक समाप्त नहीं होता। कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा की वर्तमान पहल कांग्रेस की पुरानी नीतियों और प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने की शुरुआत भी कांग्रेस की सरकारों द्वारा की गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि 1989 और 1993 में पंचायत एवं नगर निकायों में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण की नींव रखी गई थी, जो बाद में कानून बना। साथ ही डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाया गया। वंदना राजपूत ने कहा कि आज देशभर में लाखों महिला जनप्रतिनिधि पंचायतों और नगर निकायों में कार्यरत हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस हमेशा से महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं के अधिकारों की पक्षधर रही है। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/ 13 अप्रैल 2026