कांग्रेस का आरोप, परिसीमन पर चर्चा करने से भाग रही सरकार नई दिल्ली (ईएमएस)। महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र ने सहमति बनाने की कोशिशें तेज कर 2029 के आम चुनाव से लागू करने का साफ संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से सहयोग की अपील की है, लेकिन पूरे मामले में परिसीमन सबसे बड़ा पेंच बनकर सामने आया है, जिस पर मोदी सरकार अब भी स्पष्ट रुख सामने नहीं ला रही। विपक्ष, खासकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिल की प्रक्रिया के समय और मंशा पर सवाल उठाया है, इससे मुद्दा राजनीतिक सहमति से ज्यादा टकराव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। दरअसल,16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के लिए सरकार फिर संविधान संशोधन विधेयक ला रही है। खुद पीएम मोदी ने इसका खुलासा किया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि परिसीमन आयोग के गठन व लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या में संभावित बदलाव के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी हो रही है। हालांकि मोदी सरकार की ओर से इस पर औपचारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना गठबंधन की सरकार के लिए आसान नहीं है। इसके लिए सरकार अपने सहयोगी सभी दलों को साथ रखकर विपक्षी दलों को साधना जरूरी है। संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए कुल सदस्यों के पचास फीसदी सदस्यों का सदन में मौजूद रहना जरूरी है। वहीं मौजूद सदस्यों में से दो तिहाई के समर्थन से ही विधेयक पारित हो सकता है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक दलों के नेताओं को लिखे पत्र में कहा कि देश की बेटियां आज स्पेस, खेल, सेना और स्टार्टअप्स जैसे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। इसके बाद राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाना समय की मांग है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू करने का सही समय है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल से संसद में इस बिल पर ऐतिहासिक चर्चा शुरू होने जा रही है। यह लोकतंत्र को मजबूत करने और सभी को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि 2023 में संसद में सभी दलों ने मिलकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन किया था। उस दिन को वह भारत की संसदीय यात्रा का एक प्रेरक और ऐतिहासिक क्षण था। उन्होंने उम्मीद जाहिर की हैं कि इस बार भी सभी दल उसी भावना के साथ आगे आएंगे। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पीएम मोदी को जवाबी पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना ठीक नहीं है। इससे लगता है कि यह महिला सशक्तिकरण से ज्यादा राजनीतिक लाभ की जल्दबाजी के लिए हैं। यह विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है। सरकार परिसीमन के मुद्दे पर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं कर रही है, जबकि यह कानून उससे जुड़ा हुआ है। 2023 में महिला आरक्षण का विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और उस समय कांग्रेस ने इस तुरंत लागू करने की मांग की थी, लेकिन अब 30 महीने बाद अचानक सरकार फिर से चर्चा में ला रही है। आशीष दुबे / 14 अप्रैल 2026