14-Apr-2026
...


कॉम पी सी जोशी एक दूरदर्शी विचारक और बड़े संगठनकर्ता थे-- कौशल शर्मा ग्वालियर (ईएमएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला ग्वालियर ने आज संविधान निर्माता डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर फूलबाग ग्वालियर स्थित अंबेडकर पार्क पहुंचकर बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण पर किया एवं उसके बाद पार्टी कार्यालय सरवटे भवन हजीरा ग्वालियर पर पहुंचकर संविधान निर्माता डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कॉमरेड पीसी जोशी (पूरन चंद जोशी) के तस्वीर पर माल्यार्पण करते हुए विचार गोष्ठी आयोजित की गई। विचार गोष्ठी मैं उपस्थित सदस्यों को मध्य प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य कॉमरेड कौशल शर्मा एडवोकेट एवं ग्वालियर जिला सहसचिव शैलेश परमार ने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर साहब के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए समाज में फैली असमानता को दूर करके ही किया जा सकता है । स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड पी.सी जोशी का जन्म हिमालय के ढलान पर बसे अल्मोड़ा में 14 अप्रैल 1907 को हुआ था उनके पिता पंडित हरनंदन जोशी उस समय के विख्यात हेड मास्टरों में से एक थे बाद में वे सेंट्रल प्रोविंस के शिक्षा निदेशक हुए। कॉमरेड पीसी जोशी के स्कूली दिनों में गांधीजी के असहयोग आंदोलन की लहर पहाड़ियों तक पहुंच गई थी । सरकारी उपाधियों की वापसी, सरकारी स्कूलों, कॉलेजो, अदालतों के बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, कर (टैक्स) देने की मनाही आदि के गांधी जी के कार्यक्रम से नए स्वदेशी वातावरण का सृजन हुआ ।गांधी जी के स्वराज के नारों से बालक पूरन जाग उठा। सन 1920 में गवर्नमेंट हाई स्कूल हापुर जिला मेरठ से मैट्रिक पास हुए । हिंदू मुस्लिम दंगों की वारदातों के बाद जब गांधी जी ने आंदोलन वापस ले लिया गया तो किशोर पूरन जोशी विचलित और भ्रमित हुए । सन 1922 में वह अल्मोड़ा गवर्नमेंट इंटरमीडिएट कॉलेज से छात्र के रूप में संस्कृत में स्वर्ण पदक के साथ पास हुए 1924 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी, इतिहास, एवं अर्थशास्त्र से स्नातक हुए, 1928 - 29 में एलएलबी पास हुए । कॉमरेड पीसी जोशी की राजनीतिक यात्रा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक युवा छात्र के रूप में प्रारंभ हुई और वह ब्रिटिश कम्युनिस्टों से प्रभावित थे जब वह 22 साल की उम्र में मेरठ षड्यंत्र मामले में कैदी थे तब उन्होंने ब्रिटिश कम्युनिस्टों की संगति में मार्क्सवाद का बारीकी से अध्ययन किया। कॉम पीसी जोशी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में कई जन संगठनों का गठन किया और बडाकर उनके अनुसार जन मोर्चे कम्युनिस्टों के लिए तैयार किये। कॉम पी सी जोशी गैर कम्युनिस्ट प्रगतिशील और देशभक्त ताकतों से मिलने ।के लिए आधार थे। कॉम जोशी के पास एक विजन था और उन्होंने लोगों के मुहावरों में बात की उन्होंने छोटी सी पार्टी को राष्ट्रीय कद ऊंचा किया । कॉम पी सी जोशी ने 1936 में ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ,प्रगतिशील लेखक संघ ,ऑल इंडिया किसान सभा के गठन में विशेष योगदान दिया। जन संगठनों में मूल्यों को विकसित करने पीसी जोशी ने जबरदस्त भूमिका अदा की और उस समय चल रहे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को देखते हुए साम्राज्यवाद विरोधी विभिन्न ताकतों को इकट्ठा करने में कॉम पीसी जोशी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। आज जब हम सांप्रदायिकता, फासीवाद, दक्षिणपंथी ताकतों से लड़ रहे हैं तो एकजुट होकर रणनीति बनाने के लिए कॉम पीसी जोशी के विचारों की भूमिका अधिक प्रासंगिक है। कॉम पीसी जोशी के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए हमें कम्युनिस्ट पार्टी के जन संगठन को मजबूत करके वर्ग संघर्ष तेज करने की जरूरत है हर क्षेत्र में मजदूरों किसानों का शोषण हो रहा है हमें उनके हक अधिकार के लिए उनको संगठित कर उनके साथ हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज को बुलंद करने की जरूरत है। आज के संगोष्ठी कार्यक्रम में कॉमरेड अशोक पाठक,अनवर खान, रमेश सविता, प्रकाश वर्मा, भूपेश पलरया, जालिम सिंह, अंजलि परमार ,ज्ञान देवी वर्मा, लक्ष्मी जाटव ,बिरखा राम , प्रीतम माहौर, सुनील खरेटिया ,अमर वर्मा ,विनोद वर्मा, राहुल जाटव, रोशन जी ,सुरेंद्र वर्मा ,अशोक वर्मा, सुरेंद्र सविता, मनीषा जाटव,रामदास जाटव ,मनीष जाटव, राजेंद्र राणा आदि साथियों ने भाग लिया ।