अंतर्राष्ट्रीय
15-Apr-2026
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बुडापेस्ट,(ईएमएस)। हंगरी की राजनीति में 2026 के संसदीय चुनावों ने बड़ा और ऐतिहासिक परिवर्तन ला दिया है, जिसमें लंबे समय तक सत्ता में रहे प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान की सरकार का अंत हुआ है। चुनाव परिणामों में कंजरवेटिव नेता पीटर मग्यार के नेतृत्व वाली तिज्सा पार्टी ने निर्णायक जीत हासिल की। करीब 78 प्रतिशत की रिकॉर्ड मतदान दर ने चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बनाया, जिसमें युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। 2010 से सत्ता में रहे ऑर्बान ने अपनी पार्टी फिडेस के मजबूत बहुमत के आधार पर देश की राजनीतिक संरचना में कई बदलाव किए थे। उनके शासनकाल में संविधान में संशोधन हुए, न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे और मीडिया पर सरकारी प्रभाव बढ़ने के आरोप है। आलोचकों का मानना था कि सत्ता का केंद्रीकरण हुआ और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता कमजोर हुई। इसकारण धीरे-धीरे जनता के बीच असंतोष बढ़ता गया। इस असंतोष का मुख्य कारण आर्थिक और सामाजिक समस्याएं भी रहीं। बढ़ती महंगाई, रोजगार के सीमित मौके और सार्वजनिक सेवाओं जैसे स्वास्थ्य व शिक्षा की खराब स्थिति ने लोगों की नाराजगी को बढ़ाया। साथ ही भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। विदेश नीति के मोर्चे पर भी ऑर्बान सरकार विवादों में रही। रूस के प्रति नरम रुख और यूरोपीय संघ के साथ लगातार तनाव ने हंगरी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को प्रभावित किया। यूरोपीय संघ द्वारा फंड रोकने और संबंधों में गिरावट ने जनता में अलगाव की भावना को और मजबूत किया। विपक्षी एकता इस चुनाव का सबसे बड़ा कारक बनी। अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल पीटर मग्यार के नेतृत्व में एकजुट हुए और भ्रष्टाचार विरोधी तथा “व्यवस्था परिवर्तन” के एजेंडे पर चुनाव लड़ा। सोशल मीडिया और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने भी विपक्ष को मजबूती दी। आशीष/ईएमएस 15 अप्रैल 2026