15-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। वर्तमान समय में कब्ज, गैस, पेट फूलना और अपच जैसी शिकायतें अब रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे व्यक्ति की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य प्रभावित होता है। ऐसे में, पवनमुक्तासन नामक एक प्राचीन योगासन इन समस्याओं के लिए एक प्राकृतिक और अत्यंत प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। यह आसन न केवल पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि यह पेट, जांघों और कमर के आसपास जमा अतिरिक्त वसा को घटाने में भी सहायक सिद्ध होता है, जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है। पवनमुक्तासन नाम संस्कृत के तीन शब्दों के मेल से बना है: पवन जिसका अर्थ वायु है, मुक्त का अर्थ छोड़ना और आसन का अर्थ मुद्रा है। इस प्रकार, यह वह योग मुद्रा है जो शरीर में फंसी हुई अंदरूनी वायु (गैस) को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे पेट की असहजता दूर होती है। आयुष मंत्रालय भी इस आसन के लाभों को स्वीकार करता है, जिसके अनुसार पवनमुक्तासन पेट की गैस, कब्ज और अन्य पाचन संबंधी विकारों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है। यह पेट के आंतरिक अंगों की कोमल मालिश करता है, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और वात (वायु) संबंधी विकारों में विशेष राहत प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह पीठ दर्द को कम करने और पेट की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पवनमुक्तासन के लाभ केवल पेट की समस्याओं तक ही सीमित नहीं हैं। यह पेल्विक और प्रजनन अंगों की मांसपेशियों को भी सुदृढ़ करता है। महिलाओं के लिए, मजबूत पेल्विक मांसपेशियां मासिक धर्म चक्र को नियमित रखने और समग्र प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं। इस आसन का अभ्यास करना बेहद सरल है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण या महंगे प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। इसे किसी योग मैट या स्वच्छ फर्श पर आसानी से किया जा सकता है। अभ्यास के लिए, पीठ के बल लेट जाएं, फिर धीरे-धीरे अपने घुटनों को मोड़कर सीने की ओर लाएं और हाथों से उन्हें मजबूती से पकड़ लें। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक गहरी सांस लेते हुए बने रहें, फिर धीरे-धीरे पैरों को वापस जमीन पर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को दिन में 2 से 3 बार दोहराने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होने लगते हैं। इसे सुबह खाली पेट या शाम को हल्का भोजन करने के लगभग 2-3 घंटे बाद किया जा सकता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में इस आसन से बचना चाहिए, जैसे गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप, हर्निया या हाल ही में हुई पेट की किसी भी सर्जरी के बाद। सुदामा/ईएमएस 15 अप्रैल 2026