राष्ट्रीय
15-Apr-2026
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नोएडा,(ईएमएस)। सेक्टर 63 में बुधवार सुबह भी बड़ी संख्या में कर्मचारी विरोध जताने पहुंचे थे, जिन्हें पुलिस ने समझा-बुझाकर वहां से हटाया। इसके बाद कई कंपनियों में काम धीरे-धीरे शुरू हुआ है। औद्योगिक अशांति का यह सिलसिला अब ग्रेटर नोएडा तक भी फैल गया है, जहां एक निजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी वेतन वृद्धि और ओवर टाइम के भुगतान की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। शहर में चारों ओर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और भारी पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। अब मेडस कम वेतन को लेकर आक्रोशित हैं। उन्होंने भी प्रदर्शन किए है। औद्योगिक नगरी नोएडा में श्रमिकों और कर्मचारियों का आंदोलन अब रिहाइशी इलाकों तक पहुंच गया है। निजी कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा पिछले छह दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच, अब हाउसिंग सोसायटियों में काम करने वाली घरेलू महिला कामगारों (मेड्स) ने भी मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को सेक्टर 137 स्थित पूर्वांचल सोसाइटी, इकोसिटी और आसपास की अन्य सोसायटियों के बाहर बड़ी संख्या में मेड्स एकत्र हुईं और अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं का मुख्य मुद्दा उचित वेतन और काम के घंटों का निर्धारण न होना है। उनका आरोप है कि बढ़ती महंगाई के बावजूद उन्हें नाममात्र का वेतन दिया जा रहा है और काम का बोझ अत्यधिक है। इसके अलावा, सोसायटियों के कड़े नियमों, जैसे लिफ्ट के उपयोग पर प्रतिबंध, प्रवेश-निकास की जटिल प्रक्रिया और पहचान पत्र की अनिवार्यता को लेकर भी गहरा रोष है। कुछ कामगारों ने सोसाइटी निवासियों और प्रबंधन पर उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार न करने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, सोसाइटी प्रबंधन का तर्क है कि सुरक्षा के मद्देनजर बायोमेट्रिक और पहचान सुनिश्चित करना अनिवार्य है। प्रबंधन ने कहा है कि वे बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती भी की गई है। दूसरी तरफ, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में निजी कंपनियों के कर्मचारियों का आंदोलन भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। कर्मचारी अपनी न्यूनतम सैलरी 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग पर अड़े हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार देर रात करीब 3,000 रुपये तक की तात्कालिक वेतन वृद्धि का आदेश जारी किया था और आश्वासन दिया था कि कंपनियों से चर्चा के बाद इसे और बढ़ाया जा सकता है, लेकिन कर्मचारी इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिखे। वीरेंद्र/ईएमएस/15अप्रैल2026