वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी अप्रत्याशित कूटनीति से दुनिया को हैरान कर दिया है। ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अगले दो दिनों के भीतर शुरू हो सकती है। इस महत्वपूर्ण बातचीत के लिए ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान को ही आयोजन स्थल (वेन्यू) के रूप में चुना है। ट्रंप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों के बीच नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क में मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगले दो दिनों में कुछ बड़ा होने की संभावना है। उन्होंने किसी अन्य देश के बजाय पाकिस्तान में ही बातचीत जारी रखने का तर्क देते हुए कहा कि हमें ऐसे स्थान पर जाने की जरूरत नहीं है जिसका इस पूरे मामले से सीधा सरोकार न हो। इस दौरान ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला रुख पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के प्रति रहा। ट्रंप ने मुनीर की कार्यशैली की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल करार दिया। जानकारों का मानना है कि पिछले वर्ष क्षेत्रीय तनाव कम करने में मुनीर की भूमिका से ट्रंप काफी प्रभावित हैं। बता दें कि पिछले शनिवार को इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली अमेरिका-ईरान की पहली उच्चस्तरीय बैठक बिना किसी ठोस परिणाम के खत्म हो गई थी। अब होने वाली इस दूसरी बैठक का मुख्य उद्देश्य दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम (सीजफायर) को टूटने से बचाना है। वर्तमान में सबसे बड़ा विवाद होर्मुज की खाड़ी को लेकर है, जिसे ईरान ने बंद कर रखा है। अमेरिका हर हाल में इस व्यापारिक मार्ग को खुलवाना चाहता है, जबकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों पर रियायत की मांग पर अड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप प्रशासन इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार के बजाय सैन्य नेतृत्व को अधिक तवज्जो दे रहा है। ट्रंप के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बजाय आर्मी चीफ असीम मुनीर का जिक्र अधिक होना इस बात का संकेत है कि अमेरिका पाकिस्तान में सेना को ही मुख्य वार्ताकार मान रहा है। जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंचे थे, तब भी उनकी अगवानी मुनीर ने ही की थी। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की धरती पर होने वाली यह दूसरी कोशिश मध्य पूर्व में शांति का रास्ता साफ कर पाएगी या नहीं। वीरेंद्र/ईएमएस/15अप्रैल2026