:: दोपहर 12 से 4 के बीच बाहर निकलने से बचने की सलाह, ओआरएस और तरल पदार्थों का सेवन लाभदायक :: इंदौर (ईएमएस)। सूर्य के तल्ख तेवरों के साथ भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच तापघात (हीट स्ट्रोक) का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु में गर्म हवाओं के सीधे संपर्क में आने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसमें विशेषकर वृद्ध, बच्चे, खिलाड़ी और धूप में काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक जोखिम में रहते हैं। अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होने पर शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रणाली बाधित होती है और पसीना आना बंद हो जाता है। त्वचा का गर्म, लाल और शुष्क होना, मतली, तेज सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, उल्टियां और बेहोशी इसके प्रमुख संकेत हैं। ऐसी स्थिति में आंखों की पुतलियां छोटी हो जाती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए ताकि समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके। लू से सुरक्षित रहने के लिए खाली पेट घर से बाहर न निकलें और निरंतर पर्याप्त पानी पिएं। धूप में निकलते समय सिर ढककर रखें और हल्के रंग के सूती व पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब, चाय और कॉफी के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में निर्जलीकरण बढ़ाते हैं। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच, जब गर्मी चरम पर होती है, अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। बच्चों और पालतू जानवरों को बंद वाहनों में अकेला छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता है। धूप में निकलने से पहले कम से कम दो गिलास पानी पीना लाभदायक होता है। बाहर निकलते समय छतरी और धूप के चश्मे का उपयोग सुरक्षा प्रदान करता है। शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए ओ.आर.एस. का घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों के रस का सेवन रामबाण साबित होता है। इस दौरान भारी शारीरिक श्रम से बचने और धूप में नंगे पांव न चलने की सलाह भी विशेषज्ञों द्वारा दी गई है। प्रकाश/15 अप्रैल 2026