:: स्व-सहायता समूह की महिलाओं की अनूठी पहल, प्राकृतिक खेती और स्वावलंबन का दे रही हैं संदेश :: इंदौर/महू (ईएमएस)। पाठशाला का नाम आते ही मन में स्कूल और ब्लैकबोर्ड की तस्वीर उभरती है, लेकिन इंदौर जिले के महू जनपद में एक अलग ही नजारा है। यहां खेतों के बीच कृषि सखियों की पाठशाला लग रही है, जहां शिक्षक और छात्र कोई और नहीं, बल्कि गांव की महिलाएं ही हैं। ये किसान दीदियां पारंपरिक तरीकों को छोड़कर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और किचन गार्डन विकसित करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं। कृषि सखी पवित्रा निनामा के नेतृत्व में पांच गांवों के 100 से अधिक परिवारों ने अपने घरों में किचन गार्डन तैयार किए हैं। ये महिलाएं केवल सलाह ही नहीं दे रहीं, बल्कि खेतों में जीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक घोल तैयार करने की विधि भी सिखा रही हैं। अब तक 125 से अधिक खेतों की मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्टिंग) कराई जा चुकी है। कोलानी गांव की प्रमिला वसुनिया जैसी कई महिलाएं अब घर की बाड़ी में उगी शुद्ध सब्जियों से न केवल स्वास्थ्य सुधार रही हैं, बल्कि बाजार के खर्च में भी कटौती कर रही हैं। :: खेती के साथ विपणन में भी महिलाओं का दबदबा :: यह पहल केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रही है। जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ के अनुसार, जिले की 34 प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से महिलाएं गेहूं, मूंग और आलू के उपार्जन और विपणन (मार्केटिंग) में सक्रिय हैं। देपालपुर और महू ब्लॉक में महिलाएं समूह के जरिए कृषि उत्पाद खरीदकर उन्हें सीधे मंडी तक पहुंचा रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है। :: सफलता की मिसाल बनी 100 पाठशालाएं :: डे-एसआरएलएम के जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने बताया कि यह नवाचार बेहद सफल रहा है। जिले के 50 से अधिक गांवों में अब तक 100 से ज्यादा कृषि पाठशालाएं संचालित की जा चुकी हैं। जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृषि सखियों के माध्यम से किसानों को निःशुल्क और व्यावहारिक जानकारी मिल रही है। प्रशासन इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। प्रकाश/15 अप्रैल 2026