राष्ट्रीय
16-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने दोनों देशों के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि हमारी दोस्ती पूरी दुनिया के लिए नजीर है हम भारत को जितने तेल की जरुरत होगी उतना देंगे। यहीं रक्षा सहयोग में भी रुस भारत के साथ खड़ा है। अलीपोव ने स्पष्ट किया कि रूस, वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती भूमिका का पुरजोर समर्थन करता है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध भविष्य में और अधिक ऊंचाइयों को छुएंगे। उच्च स्तरीय राजनयिक संबंधों पर चर्चा करते हुए राजदूत अलीपोव ने बताया कि सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शामिल होने की पूरी संभावना है। साथ ही, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी रूस यात्रा को लेकर भी बातचीत जारी है। उन्होंने जोर दिया कि रूस ने ब्रिक्स के लिए भारत की प्राथमिकताओं का हमेशा समर्थन किया है। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर राजदूत ने बड़ी जानकारी देते हुए पुष्टि की कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की शेष खेप तय समय-सीमा के भीतर भारत को सौंप दी जाएगी। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल और एके-203 असॉल्ट राइफल परियोजना को द्विपक्षीय सफलता का प्रतीक बताया। अलीपोव ने यह भी साझा किया कि भारत ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 में रुचि दिखाई है, हालांकि अन्य रक्षा सौदों की गोपनीयता बनाए रखने पर भी उन्होंने बल दिया। ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर अलीपोव ने पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका की तीखी आलोचना की। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों को अविश्वसनीय साझेदार करार देते हुए कहा कि प्रतिबंधों और टैरिफ की धमकियां भारत-रूस संबंधों में बाधक बनने की कोशिश हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद रूस भारत को कच्चे तेल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में रूसी तेल की आपूर्ति में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। आर्थिक मोर्चे पर राजदूत ने 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को यथार्थवादी बताया। व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए रूस अब भारत से कृषि उत्पादों और हाई-टेक मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 95 प्रतिशत व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है, जो वैश्विक वित्तीय दबावों के बीच एक बड़ी उपलब्धि है। पश्चिम एशिया के तनाव पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इस क्षेत्र में केवल दीर्घकालिक कूटनीति से ही शांति संभव है। वीरेंद्र/ईएमएस/16अप्रैल2026