वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को राजनीतिक रूप से बड़ी संजीवनी मिली है। रिपब्लिकन बहुमत वाली अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने की डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। सीनेट ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें मांग की गई थी कि जब तक कांग्रेस (संसद) मंजूरी न दे, तब तक अमेरिका को इस संघर्ष से अपने सैनिकों को वापस बुला लेना चाहिए। उच्च सदन में यह फैसला 47 के मुकाबले 52 मतों से पारित हुआ, जो राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ और मजबूत करने वाला साबित हुआ है। यह इस साल में चौथी बार है जब सीनेट ने अपने युद्ध संबंधी अधिकारों को प्रभावी रूप से राष्ट्रपति को सौंपने का रुख अपनाया है। डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तर्क दिया कि ईरान के खिलाफ मौजूदा सैन्य कार्रवाई न तो कानूनी रूप से सही है और न ही इसे नैतिक रूप से उचित ठहराया जा सकता है। उनका मानना है कि राष्ट्रपति को बिना संसदीय अनुमति के युद्ध में आगे बढ़ने की छूट देना खतरनाक हो सकता है। दूसरी ओर, रिपब्लिकन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इस संकट की घड़ी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व पर पूर्ण भरोसा बनाए रखेंगे। उनका तर्क है कि ईरान की बढ़ती परमाणु क्षमता और इस नाजुक मोड़ पर पीछे हटने के गंभीर जोखिम इस कड़े रुख को सही साबित करते हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर से भी अब यह आवाजें उठने लगी हैं कि संघर्ष को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए। कुछ नेताओं का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले चुनावों में राष्ट्रपति के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद, अधिकांश नेताओं का मत है कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए ट्रंप का मजबूत बने रहना अनिवार्य है। वर्तमान में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच दो सप्ताह का अल्पकालिक शांति विराम (सीजफायर) लागू है, लेकिन इसकी समय सीमा अब खत्म होने की कगार पर है। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सीजफायर खत्म होने के बाद क्या रुख अपनाया जाएगा। इस बीच, उपग्रह से प्राप्त ताजा तस्वीरों (सैटेलाइट इमेजरी) ने चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिनसे पुष्टि हुई है कि ईरान इस शांति काल का उपयोग खुद को युद्ध के लिए दोबारा तैयार करने में कर रहा है। ऐसे में सीनेट से मिली इस नई ताकत के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम और भी निर्णायक होने की उम्मीद है। वीरेंद्र/ईएमएस/16अप्रैल2026