नई दिल्ली(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत ने कूटनीति और सैन्य कौशल की बिसात पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक ओर जहां पाकिस्तान जैसे देश इस संकट के दौर में खुद को शांतिदूत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत ने सेंट्रल एशिया में अपनी सक्रियता बढ़ाकर विरोधियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है। इसी कड़ी में भारतीय सेना की एक टुकड़ी उज्बेकिस्तान के नामंगन पहुंच चुकी है, जहां दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास डस्टलिक का सातवां संस्करण शुरू हो गया है। उज्बेकिस्तान के गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित इस युद्धाभ्यास का उद्घाटन समारोह भव्य रहा, जिसमें दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 12 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान की सेनाओं के बीच तालमेल, युद्ध क्षमता और आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। भारतीय सेना के अनुसार, इस दौरान मुख्य रूप से संयुक्त विशेष अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य अवैध सशस्त्र समूहों और आतंकवादी गतिविधियों को निष्क्रिय करना है। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उज्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल सईदोव ओयबेक अजादोविच ने इस सैन्य साझेदारी को ऐतिहासिक बताया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह अभ्यास पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम देने की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें सैनिकों की शारीरिक दक्षता, साझा योजना निर्माण, सामरिक पैंतरेबाजी और आधुनिक हथियारों के सटीक उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारतीय दल इस दौरान न केवल उज्बेक सेना की पद्धतियों को समझेगा, बल्कि अपने युद्ध के अनुभवों और तकनीकों को भी साझा करेगा। इस युद्धाभ्यास का समापन 48 घंटे के एक सघन वैलिडेशन एक्सरसाइज के साथ होगा, जिसमें दोनों सेनाओं की रणनीतियों और सामरिक तालमेल की प्रभावशीलता को परखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डस्टलिक के माध्यम से भारत न केवल मध्य एशिया में अपने सामरिक हितों को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि वैश्विक शांति और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहरा रहा है। ईरान जंग और होर्मुज संकट के साये में भारत का यह हिमालयी प्रयास रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/16अप्रैल2026