जब तक फैसला नहीं आता तब तक उसे भारत प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकेगा नई दिल्ली,(ईएमएस)। लंदन की कोर्ट से मुंह की खाने के बाद अब भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने नई चाल चली है। मामला अब ब्रिटेन से फ्रांस पहुंच गया है, जहां नीरव मोदी ने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया है। यह कदम ऐसे समय उठाया है जब नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में मानी जा रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह आखिरी कोशिश उसे भारत आने से बचा पाएगी या फिर अस्थायी राहत साबित होगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूरे मामले को देखें तो यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं बल्कि समय खरीदने की रणनीति मालूम होती है। भारत में पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है1 ब्रिटेन की अदालतों में करीब सभी विकल्प खत्म होने के बाद अब मोदी मानवाधिकार का तर्क देकर नया रास्ता चुना है। यह तरीका पहले भी कई मामलों में इस्तेमाल हो चुका है, लेकिन सफलता की दर बेहद कम रही है1 ऐसे में उसकी यह चाल कितनी कारगर होगी यह वक्त ही बताएगा। रिपोर्ट के मुताबिक लंदन हाईकोर्ट ने 25 मार्च को नीरव मोदी की अपील को खारिज कर दिया था, इससे उसके पास ब्रिटेन में कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था। इसके बाद उसने कई आवेदन दाखिल किया है। इस नियम के तहत आरोपी यह दलील देता है कि उसे प्रत्यर्पित किए जाने पर अपूरणीय नुकसान हो सकता है। इसी आधार पर वह अस्थायी रोक की मांग करता है। फिलहाल इस आवेदन पर विचार चल रहा है और जब तक फैसला नहीं आता तब तक उसे भारत नहीं भेजा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक रुल 39 के तहत आवेदन पूरी तरह लिखित प्रक्रिया होती है और आमतौर पर 48 घंटे के भीतर जज फैसला लेते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने पर इसमें देरी भी हो सकती है। आंकड़े बताते हैं कि 2025 में ऐसे 2701 मामलों में से सिर्फ 222 को ही मंजूरी मिली थी। इसका मतलब साफ है कि यह रास्ता आसान नहीं है और ज्यादातर मामलों में इसे खारिज कर दिया जाता है। सिराज/ईएमएस 16अप्रैल26