मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोरगांव इलाके में बढ़ते अवैध फेरीवालों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुंबई महानगरपालिका और राज्य सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साथ ही अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस एफिडेविट) दाखिल करने को भी कहा है। यह आदेश गोरगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अवैध फेरीवाले न केवल लाइसेंसधारी दुकानदारों के व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि उन्हें धमका भी रहे हैं। न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पुलिस से यह भी पूछा कि वर्षों से दर्ज शिकायतों पर उसने क्या कार्रवाई की है और क्या बार-बार शिकायतों के मामलों में ‘एक्सटर्नमेंट’ (इलाके से बाहर करने) जैसे प्रावधानों पर विचार किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील बहराइज़ ईरानी ने दलील दी कि 1996 से दुकानदार लगातार शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट के सामने 150 शिकायतों का संकलन भी पेश किया, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायतें भी शामिल हैं। कोर्ट इस मामले में 2023 से स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) याचिका की भी सुनवाई कर रहा है, जिसमें फुटपाथों पर अतिक्रमण और फेरीवालों की समस्या के समाधान पर विचार किया जा रहा है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) जमशेद मिस्त्री ने कहा कि मनपा को 2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट को सख्ती से लागू करना चाहिए, जिसके तहत समितियों का गठन और नई योजना बनाना अनिवार्य है। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील पूर्णिमा कंथारिया ने हर शिकायत दर्ज करने में प्रशासन की सीमाओं का हवाला दिया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने कानून के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार शिकायत वाले मामलों में पुलिस ‘एक्सटर्नमेंट’ की कार्रवाई कर सकती है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि वर्ष 2020 और 2025 में कुछ फेरीवालों ने एसोसिएशन के संयुक्त सचिव फिरदौस ईरानी की कार पर पथराव किया था। वहीं 2024-2025 के दौरान कई दुकानों के बरामदों पर अवैध कब्जा कर लिया गया। इससे पहले भी हाईकोर्ट BMC को मुंबई में टाउन वेंडिंग कमेटी के चुनाव परिणाम घोषित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए समय दे चुका है। स्वेता/संतोष झा-१६ अप्रैल/२०२६/ईएमएस