- फर्जी कॉल सेंटर रैकेट में आईपीएस दत्ता कराले सहित दो पुलिस अधीक्षकों की संलिप्तता, मंत्रालय की छठी मंज़िल से रैकेट को संरक्षण! - कराले सहित दो पुलिस अधिकारियों की जहां-जहां पोस्टिंग होती है, वहीं फर्जी कॉल सेंटर कैसे शुरू हो जाते हैं? - सरकारी संरक्षण के कारण ही महाराष्ट्र ड्रग्स और अवैध कॉल सेंटर जैसे गैरकानूनी धंधों का गढ़ बनता जा रहा है मुंबई, (ईएमएस)। ऑनलाइन ठगी के मामले हर जगह तेजी से बढ़ रहे हैं और ‘जामताड़ा’ रैकेट इसके लिए कुख्यात है। लेकिन ‘जामताड़ा’ की तरह ही महाराष्ट्र में भी फर्जी कॉल सेंटरों के माध्यम से दुनिया भर के नागरिकों को ठगकर सैकड़ों करोड़ रुपये का गोरखधंधा चल रहा है। यह गंभीर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दावा किया कि इस मामले में आईपीएस अधिकारी दत्ता कराले और दो पुलिस अधीक्षकों की भी संलिप्तता है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय की छठी मंज़िल से संरक्षण मिले बिना इतने बड़े पैमाने पर फर्जी कॉल सेंटर और धन की हेराफेरी संभव नहीं है। मुंबई के गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि तथाकथित ‘भोंदूबाबा’ अशोक खरात के साथ IPS अधिकारी एवं वर्तमान में नाशिक के डीआईजी दत्ता कराले के संबंधों के वीडियो हाल ही में मीडिया में सामने आए हैं। हमें जानकारी मिली है कि दत्ता कराले और पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल तथा सोमनाथ घार्गे का भी इस फर्जी कॉल सेंटर रैकेट से संबंध है। सीबीआई द्वारा 8 अगस्त 2025 और 11 सितंबर 2025 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, नाशिक और इगतपुरी में छापेमारी कर इस रैकेट को चलाने वालों को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई को इगतपुरी में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली और उसने कार्रवाई की, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? महाराष्ट्र पुलिस क्या कर रही थी? यह बड़ा सवाल है। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। राज्य के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस क्या इस मामले में सीबीआई से जानकारी लेकर उच्चस्तरीय जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे या हमेशा की तरह ‘क्लीन चिट’ देंगे? ऐसा सीधा सवाल भी सपकाल ने उठाया। इससे पहले कराले सहित ये दोनों अधिकारी ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में कार्यरत थे। उस समय भी वहां ऐसे कॉल सेंटर चल रहे थे। पुलिस ने छापा मारकर संदीप सिंह और विशाल यादव नामक आरोपियों पर मामूली कार्रवाई कर उन्हें छोड़ दिया। बाद में जब इन तीनों अधिकारियों की पोस्टिंग नाशिक क्षेत्र में हुई, तब इन्हीं आरोपियों की मदद से फिर से कॉल सेंटर शुरू किए जाने की जानकारी मिली है। खास बात यह है कि ये सभी आरोपी ठाणे, रायगढ़ और पालघर क्षेत्र के निवासी हैं। सीबीआई मुंबई की एंटी करप्शन ब्रांच के अधीक्षक अमित वसावा द्वारा 11 सितंबर 2025 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटर को सुचारु रूप से चलाने के लिए आरोपी गणेश कामनकर और उसके भाई द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को नकद, सोना और क्रिप्टोकरेंसी के रूप में भारी रिश्वत दी जा रही थी। राज्य सरकार को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद इन अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इसका जवाब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देना चाहिए, ऐसी मांग कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने की। इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करते हुए सपकाल ने कहा कि भोंदूबाबा अशोक खरात, आईपीएस दत्ता कराले और इस रैकेट से जुड़े काले धन की पूरी जांच जरूरी है। अशोक खरात प्रकरण में जो धन का लेन-देन हुआ, वह पैसा किसका था? क्या यह पैसा कॉल सेंटर रैकेट से जुड़ा है? क्या इस माध्यम से काले धन को सफेद किया गया? और यह पैसा आखिर किसका है? इन सभी सवालों की गहन जांच होनी चाहिए। दत्ता कराले और उनके सहयोगी पुलिस अधिकारियों की जहां-जहां पोस्टिंग होती है, वहां इस तरह के रैकेट सक्रिय हो जाते हैं-इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। * विधान परिषद चुनाव… हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार होना चाहिए था और विधान परिषद के लिए महाविकास आघाड़ी की ओर से उद्धव ठाकरे को उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए था-यह कांग्रेस की भूमिका थी। लेकिन वरिष्ठ नेता शरद पवार को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया गया। अब यदि उद्धव ठाकरे विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो कांग्रेस को उम्मीदवार देने का अवसर मिलना चाहिए-यह हमारी मांग है। विधान परिषद की एक सीट कांग्रेस नेता राजीव सातव की थी। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी प्रज्ञा सातव को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार को निर्विरोध चुना जाना चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री को बारामती की परंपरा का पालन करना चाहिए—ऐसा भी सपकाल ने कहा। * महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए-यह कांग्रेस की स्पष्ट भूमिका… महिला आरक्षण विधेयक को कांग्रेस पार्टी का समर्थन है-यह बात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं। वास्तव में राजनीति में महिलाओं को आरक्षण देने का निर्णय कांग्रेस सरकार ने ही लिया था और स्थानीय स्वराज संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। बाद में सोनिया गांधी ने इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की पहल की। महिला आरक्षण का विरोध किसी को नहीं है, लेकिन यदि भाजपा इस विधेयक के जरिए निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (डिलिमिटेशन) का राजनीतिक खेल खेलती है, तो उसका विरोध किया जाएगा। महाराष्ट्र को ‘गायपट्टा’ बनाने की भाजपा की कोशिशों को हम विफल करेंगे-ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा। संतोष झा-१६ अप्रैल/२०२६/ईएमएस