अंतर्राष्ट्रीय
16-Apr-2026


कैमरून (ईएमएस)। कैमरून पहुंचे पोप लियो चौदहवें ने तानाशाही को दुनिया के लिए खतरनाक करार दिया। पोप लियो ने कैमरून के शहर बामेंडा में ये बयान दिया। पोप लियो ने उम्मीद इच्छा जताई कि दुनिया में शांति का वास हो। साथ ही, उन्होंने उन लोगों को धिक्कारा जो “अपने सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक फायदे के लिए धर्म और ईश्वर के नाम का गलत इस्तेमाल करते हैं, और जो पवित्र है उसे अंधेरे और गंदगी में धकेलते हैं।” वेटिकन न्यूज के अनुसार, पोप लियो ने कहा कि जंग को बढ़ावा देने वाले यह मानने से ही इनकार कर देते हैं कि तबाही में एक पल लगता है, लेकिन उसे दोबारा बनाने में पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है। कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु ने कहा, “कुछ तानाशाह” यह मानने से इनकार करते हैं कि “तबाही करने में बस एक पल लगता है, लेकिन सब कुछ दोबारा बनाने के लिए पूरी जिंदगी काफी नहीं होती।” पोप ने दुख जताया कि कैसे सत्ता में बैठे लोग हत्या और तबाही पर अरबों डॉलर खर्च कर देते हैं, “फिर भी इलाज, शिक्षा और बहाली के लिए जरूरी रिसोर्स कहीं नहीं मिलते।” उन्होंने आगे कहा कि लोग अफ्रीका के संसाधन का उपयोग हथियार खरीदने के लिए करते हैं, “अस्थिरता और मौत के कभी न खत्म होने वाले चक्र को जारी रखते हैं।” पोप ये बातें कैमरून के जातीय संघर्ष को लेकर कर रहे थे। लेकिन इन दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु पर टिप्पणियां भी चर्चा में रही हैं। हालिया विवाद की नींव ईस्टर के आसपास पड़ी, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी धमकियां देनी शुरू कर दीं। जवाब में पोप लियो ने अपने पाम संडे संदेश में कहा कि ईश्वर उन लोगों की प्रार्थनाओं को खारिज कर देता है जो युद्ध छेड़ते हैं। पोप की टिप्पणियों को ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलकर पोप की आलोचना शुरू की। रविवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोप को कमजोर बताया। कैथोलिक धर्म अपना चुके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि पोप लियो को धर्मशास्त्र के बारे में बोलते समय सावधान रहना चाहिए सुबोध/१६ -०४-२०२६