नई दिल्ली,(ईएमएस)। एक ओर जहाँ अमेरिका मध्य पूर्व के संकटों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव में उलझा हुआ है, वहीं दूसरी ओर चीन ने उसे आर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ी चुनौती दे दी है। लंबे समय तक दुनिया का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र माने जाने वाले अमेरिका को अब चीन अपनी तेज रफ्तार से पीछे छोड़ने की दिशा में बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन का ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर असाधारण उछाल पर है, जबकि अमेरिका की स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल और चेज ट्रैवल द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में चीन के पर्यटन क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा वैश्विक औसत से दोगुना है। इसके ठीक उलट, अमेरिका की विकास दर मात्र 0.9 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो अगले 3 से 5 वर्षों के भीतर चीन दुनिया की सबसे बड़ी टूरिज्म इकॉनमी के रूप में स्थापित हो जाएगा। चीन की इस सफलता के पीछे विदेशी पर्यटकों का बढ़ता रुझान प्रमुख कारण है। चीन में विदेशी पर्यटकों द्वारा किए जाने वाले खर्च में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि अमेरिका में इसी मद में 5% की गिरावट देखी गई है। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके कड़े इमिग्रेशन नियम और वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव साबित हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल अमेरिका पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में 5.5 प्रतिशत की कमी आई है। यद्यपि वर्तमान में कुल आर्थिक योगदान के मामले में अमेरिका का पलड़ा भारी है—जहाँ अमेरिका का पर्यटन क्षेत्र जीडीपी में 2.6 ट्रिलियन डॉलर का योगदान देता है और चीन 1.8 ट्रिलियन डॉलर पर है-लेकिन दोनों देशों की विकास दर का यह अंतर जल्द ही इस फासले को खत्म कर सकता है। आगामी फीफा वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों से अमेरिका को उम्मीदें जरूर हैं, लेकिन युद्ध और अस्थिरता उसके पर्यटन भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 17 अप्रैल 2026