क्षेत्रीय
17-Apr-2026
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जबलपुर, (ईएमएस)। सुनीता देवी, जो एक गृहिणी थीं, उन्हें फेफड़ों में गंभीर समस्या हो गयी थी। एक दिन सुनीता को ऐसी खांसी हो गई जो ठीक नहीं हो रही थी। आखिरकार, उसके परिवार वाले उसे अस्पताल ले गए और कुछ जांचों के बाद डॉक्टर ने गंभीर स्थिति की पुष्टि की सुनीता को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) थी, और उन्होंने फेफड़े के प्रत्यारोपण की सलाह दी, जिसमें क्षतिग्रस्त फेफड़े को स्वस्थ फेफड़े से बदल दिया जाता है। मेदांता के इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी के चेयरमैन डॉ. अरविंद कुमार ने कहा, “फेफड़ों की आखिरी स्टेज की बीमारी एक ऐसी मेडिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति के फेफड़े इस हद तक खराब हो जाते हैं कि वे शरीर में ऑक्सीजन का सामान्य स्तर बनाए नहीं रख पाते। इसका मतलब है कि फेफड़े अपने काम करने की आखिरी स्टेज पर पहुँच चुके होते हैं और अब उनका कोई मेडिकल इलाज या उपाय उपलब्ध नहीं होता। ठीक इसी स्थिति में फेफड़ों का ट्रांसप्लांट ही आज के समय में उपलब्ध एकमात्र विकल्प बन जाता है।” सुनील साहू / मोनिका / 17 अप्रैल 2026/ 03.17