::भोपाल की संस्था ने कलेक्टर, कमिश्नर और विधायक से की शिकायत, दिए प्रमाण:: इन्दौर (ईएमएस) एनजीओ के माध्यम से नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे एनिमल बर्थ कंट्रोल अभियान के तहत श्वानो पर अभी तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं और अभी भी करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं लेकिन श्वानों की संख्या और डॉग बाइट के मामलो में कमी आने के बजाय उनमें लगातार बढ़ोतरी ही हो रही है और वह भी तेजी से। जिसके चलते इसमें शामिल एनजीओ और निगम अधिकारियों पर भोपाल की संस्था संस्था प्रकृति फाउंडेशन ने अवैधानिक तरीके से काम करने के गंभीर आरोप लगाते शिकायत की है। शिकायत के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक इन एनजीओ के पास एनिमल वेलफेयर बोर्ड से जारी होने वाला पीआरसी सर्टिफिकेट नहीं था। इसके बिना श्वानों की नसबंदी करना अवैधानिक श्रेणी में आता है। यही नहीं मानकों का उल्लंघन कर नसबंदी की जा रही है इस कारण केंद्रों पर श्वानों की मौतें हो रही है। संस्था द्वारा शिकायत के साथ केन्द्र के अंदर के कुछ विडियो फुटेज भी निगम अपर आयुक्त प्रखर सिंह को सौंपे गए हैं। मामले में निगम अपर आयुक्त प्रखर सिंह के अनुसार शिकायतकर्ता ने प्रमाण दिए हैं। जांच में त्रुटि पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। एबीसी सेंटर को उन्नत करने के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इसका अपूवल मिलते ही प्रतिदिन होने वाली नसबंदी की संख्या में इजाफा होगा। वहीं संस्था प्रकृति फाउंडेशन की डायरेक्टर रुचिरा सामल के अनुसार इंदौर के श्वान नसबंदी केंद्र में गैर मान्यता प्राप्त संस्था काम कर रही है। एबीसी का काम करने वाली सभी एजेंसियों के पास एनिमल वेलफेयर बोर्ड द्वारा जारी किया जाने वाला पीआरसी होना जरूरी है। इंदौर में काम कर रही एनजीओ संस्था के पास यह प्रमाण पत्र नहीं है। शिकायत दिल्ली तक की है। यही नहीं एनजीओ संस्था द्वारा कम क्षमता के बाद भी अधिक एबीसी का दावा किया जा रहा है। डॉग्स के रेस्क्यू और नसबंदी करने का जिम्मा अलग-अलग टीम के पास होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं हो रहा है। सामल के अनुसार कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और विधायक रमेश मेंदोला को की गई लिखित शिकायत में यह भी कहा गया है कि एनिमल वेलफेयर बोर्ड द्वारा श्वानों की नसबंदी के लिए 1450 रुपए की अनुशंसा की जाती है, लेकिन इंदौर में 800 रुपए प्रति नसबंदी के अनुसार भुगतान किया जा रहा है। विधायक मेंदोला ने मामले में शिकायत के आधार पर कलेक्टर को पत्र लिखकर जांच कराने को कहा है। आनंद पुरोहित/ 19 अप्रैल 2026