नई दिल्ली,(ईएमएस)। आबकारी नीति मामले में जारी कानूनी खींचतान के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष पेश होंगे। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने जानकारी दी कि केजरीवाल इस बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने अपनी बात रखेंगे। इस पेशी का मुख्य उद्देश्य अदालत से उनके प्रति-जवाब को रिकॉर्ड पर लेने का विनम्र आग्रह करना है। जिसे लेकर पार्टी ने न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में बताया कि केजरीवाल अपनी कानूनी लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनके दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने में अड़चनें आ रही हैं। भारद्वाज के अनुसार, केजरीवाल ने पिछले सप्ताह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के परिवार से संबंधित कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने की कोशिश की थी, जिसे शुरू में स्वीकार नहीं किया गया था। इसी वजह से उन्हें खुद अदालत में पेश होकर निवेदन करना पड़ा था। अब ताजा विवाद सीबीआई के जवाब पर केजरीवाल द्वारा दिए जाने वाले प्रति-जवाब को लेकर है। भारद्वाज ने दावा किया कि सीबीआई के हलफनामे पर केजरीवाल अपना जवाब दाखिल करना चाहते हैं, लेकिन उसे भी रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपी पक्ष के आवेदनों, हलफनामों और जवाबों को रिकॉर्ड का हिस्सा ही नहीं बनाया जाएगा, तो न्याय मिलना कैसे संभव होगा? इसी सिलसिले में सोमवार सुबह 10:30 बजे अरविंद केजरीवाल वर्चुअल रूप से अदालत में हाजिर होंगे। इससे पहले बीते गुरुवार को भी केजरीवाल वर्चुअल रूप से पेश हुए थे और न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की पीठ से अतिरिक्त हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने का आग्रह किया था। पिछली सुनवाई में अदालत ने उनके आग्रह को स्वीकार कर लिया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि वह मामले की सुनवाई से खुद के अलग होने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनवाई को फिर से शुरू नहीं कर रही हैं। केजरीवाल ने अपनी याचिकाओं में न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की न्यायिक निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि जज के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और उन्हें सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से काम मिलता है। केजरीवाल की दलीलों के अनुसार, जज के बेटे को पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में सरकारी मामले सौंपे गए हैं, जिससे हितों का टकराव पैदा हो सकता है। फिलहाल, जस्टिस शर्मा के सुनवाई से अलग होने की मांग वाली इस याचिका पर अदालत ने 13 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार की पेशी के दौरान केजरीवाल अदालत से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करेंगे कि उनके सभी कानूनी तर्कों और दस्तावेजों को निष्पक्ष सुनवाई के लिए रिकॉर्ड पर दर्ज किया जाए। वीरेंद्र/ईएमएस/19अप्रैल2026 -----------------------------------