लेख
19-Apr-2026
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महिला आरक्षण नेरेटिव से जीतेगी एनडीए केंद्र सरकार और भाजपा ने मिलकर विपक्ष को अपने जाल में बुरी तरह से फंसा लिया है। जिस तरह की स्थिति परिसीमन बिल के संसद में गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव में महिलाओं के आरक्षण का जो मुद्दा तैयार किया है। इंडिया गठबंधन और कांग्रेस के ऊपर जिस तरह का हमला चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा द्वारा किया जा रहा है। उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है, भाजपा चार राज्यों के विधानसभा चुनाव को स्पष्ट बहुमत के साथ जीतने का जो नॉरेटिव बनाना चाहती थी। वह भाजपा ने बना लिया है। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यों की विधानसभा में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। तमिलनाडु में 234 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। असम, केरल और पांडिचेरी में पहले ही 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है। भाजपा ने एक सु‎नियोजित रणनीति के तहत तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया इसमें परिसीमन बिल को संशोधन के लिए लाया गया। सरकार ने परिसीमन बिल के स्थान पर इसे महिला आरक्षण बिल के नाम पर प्रचा‎रित ‎किया है। उसमें उन्हें पता था, विपक्ष परिसीमन के इस बिल को स्वीकार नहीं करेगा, लोकसभा में यह बिल पास नहीं होगा। उसके बाद तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में महिला आरक्षण के मुद्दे पर म‎हिला मतदाता के समर्थन से चुनाव जीतने का सुनयोजित रूप से नेरेटिव बनाया जाएगा। उसी रणनीति के तहत भाजपा काम कर रही है। इसके पहले तीन तलाक के मुद्दे पर जो नेरेटिव भाजपा ने म‎हिला मतदाताओं के नाम से तैयार किया था। उसके आधार पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों में भाजपा को बड़ी संख्हि में मु‎स्लिम म‎हिलाओं के वोट मिले। भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं द्वारा भाजपा के पक्ष में मतदान करने का दावा किया था। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार इत्यादि के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इसी तरह से पहले नॉरेटिव तैयार किया। जमीनी स्तर पर भाजपा का भारी विरोध होने के बाद भी इन सभी राज्यों में भाजपा को अप्रत्याशित जीत हासिल हुई। भाजपा ने हर राज्य में नेरेटिव से जोड़कर जीत हासिल की। इसमें चुनाव आयोग की भी बड़ी भू‎मिका थी। इस बार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव को लेकर पिछले 1 वर्ष से भाजपा लगातार प्रयासरत थी। केंद्रीय चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले एसआईआर का खेल शुरू कर ‎दिया है। बड़ी संख्या में एसआईआर में वोट काटे और जोड़े जाते हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में मतदाताओं की संख्या मतदान के बाद और मतगणना के प‎हिले बढ़ाई गई थी, उस समय उन राज्यों में एसआईआर नहीं कराई गई थी। मतगणना के पूर्व मतदाताओं की संख्या में जरूर भारी इजाफा हुआ था। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर का नया फंडा शुरू कर ‎दिया है। बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए। अब यही खेल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों में भी खेला गया है। असम में एस आईआर नहीं कराया गया। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु इस बार भाजपा के निशाने पर थे। चुनाव के ठीक पहले जिस तरह से चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन बिल को महिला आरक्षण बिल से जोड़कर जो राजनीति भाजपा द्वारा की जा रही है, परिसीमन बिल गिरने के बाद इस महिला आरक्षण बिल से जोड़कर टीएमसी, कांग्रेस और डीएमके को निशाने पर लिया गया है। उसके बाद यह चर्चा होने लगी है, इस बार का नॉरेटिव महिला आरक्षण बिल है। इस बार चार राज्यों की भाजपा जीत को महिलाओं से जोड़कर प्रचारित किए जाने की रणनी‎ति बीजेपी ने तैयार कर ली है। असम में पहले से ही भाजपा की सरकार है। केरल में कम्युनिस्टों की सरकार है। इस बार यहां कांग्रेस की सरकार आने की कयास लगाए जा रहे हैं। तमिलनाडु में भाजपा ने अन्ना डीएमके के साथ गठबंधन कर रखा है। तमिलनाडु में एनडीए गठबंधन की जीत का दावा भाजपा द्वारा किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता दीदी की पूरी तरह से घेराबंदी हो चुकी है। पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार भाजपा महिलाओं द्वारा उसे भारी समर्थन ‎दिया है। इस आधार पर जीत का माहौल अभी से बनाना शुरू कर दिया है। जब चुनाव परिणाम आएंगे, तब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम सारे देश को चौंका देंगे। सरकार और भाजपा महिला आरक्षण विधेयक को विपक्ष द्वारा गिरा दिए जाने से महिलाओं की नाराजी से जोड़ेगी। महिलाओं का समर्थन भाजपा को ‎मिला है, इस धारणा पर भाजपा अपनी जीत को सही साबित करेगी। केंद्रीय चुनाव आयोग की बात, तो 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद यदि विपक्ष हाय तोबा मचाएगी, ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग और हाईकोर्ट की लंबी प्रक्रिया में ‎विपक्ष उलझेगा। सरकार भाजपा की बन जाएगी, जो जीता वही सिकंदर की तर्ज पर। इस बार भाजपा कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहती है। वर्तमान में जो स्थितियां हैं, केंद्र सरकार और भाजपा ने जो रणनीति और नेरेटिव तैयार किया है। उसको देखते हुए यह माना जा सकता है ‎कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में चार राज्यों के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए स्पष्ट बहुमत वाले होंगे। 4 मई को विपक्ष के लिए यह सबसे बड़ा झटका साबित होगा। संसद में राहुल गांधी जादू और जादूगर का उल्लेख कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें बोलने नहीं ‎दिया। 4 मई को अब राहुल गांधी और इं‎डिया गठबंधन जादूगर के जादू को देखेगी। इसका अहसास होने लगा है। एसजे/ 19 अप्रैल /2026