राष्ट्रीय
19-Apr-2026
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जयपुर,(ईएमएस)। राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि आपसी लेनदेन, जमीन-जायदाद और कॉमर्शियल विवाद जैसे मामलों में, जब तक स्पष्ट आपराधिक तत्व न हो, पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति प्रमिल कुमार माथुर की एकलपीठ ने यह आदेश 18 अप्रैल को सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी धर्मेंद्र ठक्कर सहित अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए की। मामले में यह सामने आया कि टोंक जिले के निवाई थाना पुलिस ने एक व्यावसायिक विवाद को आपराधिक मामला मानते हुए एफआईआर दर्ज कर ली थी। शिकायत के अनुसार, एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को माल बेचा था, लेकिन करीब 18 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। आरोपी पक्ष का कहना था कि यह पूरी तरह सिविल प्रकृति का मामला है, लेकिन पुलिस ने इसे आपराधिक रंग देकर कार्रवाई शुरू कर दी। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और डीजीपी के सर्कुलर में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि सिविल मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी चिंताजनक है। कोर्ट ने राजीव कुमार शर्मा (डीजीपी) को निर्देश दिया कि वे इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करें। साथ ही, यह भी कहा गया कि संबंधित मामले में सर्कुलर का पालन क्यों नहीं हुआ, इसकी जांच की जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सिविल मामले में आपराधिक पहलू होने को लेकर संदेह हो, तो एफआईआर दर्ज करने से पहले संबंधित पुलिस अधीक्षक (एसपी) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। हिदायत/ईएमएस 19अप्रैल26