अंतर्राष्ट्रीय
20-Apr-2026
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लंदन (ईएमएस)। अभिभावकों के लिए अपने छोटे बच्चों को पढ़ाते समय अत्यधिक धैर्य की जरुरत होती है। कई बार बच्चे नहीं पढ़ने के बहाने बनाने लगते हैं और बार-बार थका हुआ महसूस करते हैं। अभिभावक इसे अक्सर बच्चों का आलस मान बैठते हैं, लेकिन यह हकीकत में पढ़ाई के अत्यधिक दबाव और तनाव का परिणाम हो सकता है। बच्चे अपनी भावनाओं को ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते, जिसके कारण उनके व्यवहार में इस प्रकार का परिवर्तन देखने को मिलता है। वे सिर्फ पढ़ाई से भागना नहीं चाहते, बल्कि पढ़ाई के नाम से डरने लगते हैं। बच्चों में इस तरह का तनाव कई कारणों से पनप सकता है। सबसे पहला कारण माता-पिता की अत्यधिक उम्मीदें हो सकती हैं। जब माता-पिता अपने बच्चे से हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं, तो बच्चे पर दबाव बढ़ जाता है। दूसरा, बार-बार बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करना, जैसे देखो शर्मा जी का बेटा कितना पढ़ता है, बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर करता है और उनमें हीन भावना पैदा करता है। इसके अलावा, बिना किसी ब्रेक के लगातार पढ़ाई करना या छोटी-छोटी गलतियों पर अत्यधिक डांट-फटकार भी बच्चे को मानसिक रूप से थका देती है और उन्हें पढ़ाई से दूर करती है। बच्चा मन ही मन डरने लगता है और पढ़ाई को एक बोझ समझने लगता है। अब सवाल यह है कि ऐसे में माता-पिता बच्चे को कैसे समझें और उसकी मदद कैसे करें। इसके लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना आवश्यक है। सबसे पहले, बच्चे के साथ अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। उनसे खुलकर बात करें, उनकी दुनिया को समझने का प्रयास करें और यह जानने की कोशिश करें कि उनके मन में क्या चल रहा है और वे किस बात से परेशान हैं। दूसरा, पढ़ाई के वक्त बच्चे के साथ अत्यधिक सख्ती न बरतें। ज्यादा सख्ती बच्चे को मन से कमजोर और डरा हुआ महसूस करा सकती है, जिससे वह और अधिक तनावग्रस्त हो सकता है। इसके बजाय, प्यार और धैर्य से उन्हें पढ़ाने और समझाने की कोशिश करें। ऐसा करने से बच्चे का आधा तनाव अपने आप ही कम हो जाता है और उनमें पढ़ाई के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। इसके साथ ही, बच्चे की जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाना भी जरूरी है। बच्चों को रोज सुबह कुछ बादाम और अखरोट खाने के लिए दें, क्योंकि ये दिमागी विकास के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करते हैं। बच्चों को प्रकृति के साथ जोड़ें और उनकी शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाएं। उन्हें ऐसे खेल खेलने दें जो उनके शारीरिक विकास को तेजी से बढ़ावा दें। सुदामा/ईएमएस 20 अप्रैल 2026