अंतर्राष्ट्रीय
20-Apr-2026
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-ईरान जंग से घबराए ट्रंप की नीतियों से खाड़ी देशों का होने लगा मोहभंग वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका जब ईरान युद्ध में घुसा था, तो उसने पहले तो इस जंग के खिंचने का अनुमान नहीं लगाया था। शुरुआती दौर में उसे खाड़ी के तमाम देशों का साथ भी मिला। जब ईरान खाड़ी के दूसरे देशों पर मिसाइलें दाग रहा था, उस वक्त उन्होंने अमेरिका के मौजूद मिलिट्री बेसेज को बचाने की कोशिश की, जिसमें उनका नुकसान भी हुआ। अब युद्ध की शुरुआत हुए करीब 7 हफ्ते हो चुके हैं लेकिन जब इसका कोई अंत नजर नहीं आया तो धीरे-धीरे उनका ट्रंप की नीतियों से मोहभंग होने लगा। फिलहाल स्थिति ये है कि ट्रंप को रोजाना कोई न कोई झटका लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ताजा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात में भी ये मांग उठने लगी है कि अपनी सुरक्षा के लिए इस देश में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को बंद करने में ही भलाई है। यहां के राजनीतिक विश्लेषक अब्दुलखालेक अब्दुल्ला ने कहा कि यूएई को अब अपनी रक्षा के लिए अमेरिका की जरूरत नहीं, क्योंकि ईरानी हमलों के दौरान उसने साबित कर दिया है कि वह खुद अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है। यूएई को अब सिर्फ अमेरिका के सबसे आधुनिक और बेहतरीन हथियारों की जरूरत है। इसलिए अब समय आ गया है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने पर विचार किया जाए, क्योंकि वे अब बोझ बन चुके हैं, कोई रणनीतिक संपत्ति नहीं। युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिका का साथ वैसे तो ज्यादातर खाड़ी देश दे रहे थे, लेकिन खुलकर सामने आने वालों में यूएई सबसे आगे था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर ट्रंप ने समर्थन मांगा, तो यूएई ने सबसे पहले हुंकार भरी को वह इजराइल-अमेरिका का साथ देगा। हालांकि पहले दौर की फेल वार्ता और ट्रंप के हमलों से ज्यादा बयानों को देखकर अब यूएई भी अपना मन बदलने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उसे इस युद्ध से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। ईरानी मिसाइलों ने यूएई के वर्ल्ड क्लास शहरों दुबई और अबू धाबी को बहुत नुकसान पहुंचाया और अमेरिका उसकी रक्षा में नाकामयाब रहा, ऐसे में अब भरोसा कहीं न कहीं डगमगा चुका है। उधर सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने अमेरिका को लेकर कहा था कि अब अमेरिका पर निर्भर रहने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वह अपने ही देश की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो सऊदी अरब की रक्षा कैसे कर पाएंगे। उनके इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों और अमेरिका पर घटती निर्भरता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यूएई की ही तरह सऊदी में मौजूद मिलिट्री बेस पर भी ईरान ने जमकर मिसाइलें बरसाईं थीं। इस युद्ध की वजह से होर्मुज ब्लॉक होने से सऊदी को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है, जबकि उसकी ऑयल रिफायनरीज पर भी ईरान ने हमला किया और अमेरिका कुछ नहीं कर सका। सिराज/ईएमएस 20अप्रैल26