लेख
20-Apr-2026
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान में मात्र तीन दिन का समय शेष रह गया है। पिछले 6 माह से पश्चिम बंगाल एसआईआर और ईड़ी छापे के कारण चर्चाओं में रहा है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक टीएमसी और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लड़ाई लड़ रही हैँ। सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी स्वयं पैरवी करने के लिए पहुंच गई। इसके बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। उल्टे एक के बाद एक, उन पर शिकंजा कसता ही चला गया। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात हैं, उनके दो ठिकानों पर ईड़ी ने छापे डाले। वह अपने घर पर नहीं मिले। इसी मामले मे बिजनेस मैन जाय कामदार के ठिकाने पर छापा डालकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। उनका संबंध डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा से जोड़कर देखा जा रहा है। ईड़ी ने कुछ दिन पहले ही टीएमसी की चुनाव रणनीति का काम देखने वाली मीडिया कंपनी आई पेक के संस्थापक को गिरफ्तार कर लिया था। खबर आई, कंपनी ने टीएमसी की चुनावी रणनीति का जो काम वह कर रही थी, उस कंपनी ने काम बंद कर दिया है। ममता बनर्जी ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा, कंपनी अपना काम कर रही है। विपक्षी दल ने जानबूझकर चुनाव को प्रभावित करने के लिए यह झूठी खबर फैलाई है। केंद्रीय एजेंसियों द्वारा निश्चित रूप से टीएमसी के चुनाव प्रचार के अभियान में लगातार बाधा उत्पन्न की जा रही है। इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है। बंगाल में एसआईआर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रिब्यूनल में चल रही है। लाखों मतदाताओं को मतदान से बाहर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मतदान के एक दिन पहले तक ट्रिब्यूनल द्वारा जिन मतदाताओं के नाम मान्य किये जा रहे हैं, उन्हें मतदान करने का अधिकार होगा। बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान जिस तरह की अफरा-तफरी मची है, उसको देखते हुए मतदान और चुनाव परिणाम आने के बाद पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री के सिक्योरिटी इंचार्ज पर छापा डालकर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश टीएमसी के चुनाव को प्रभावित कर रही है। ममता बनर्जी का यह कहना चुनाव के दौरान उनकी हत्या भी हो सकती है। बड़ी चिंता का विषय है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों को समान एवं निष्पक्ष अवसर चुनाव लड़ने के लिए मिलें, यह पश्चिम बंगाल में होता हुआ नहीं दिख रहा है। केंद्रीय चुनाव आयोग जब चुनाव अंतिम चरण में हो, इन सारे विवादों में यदि चुप्पी साधकर रखता है तो इसका व्यापक असर जन सामान्य और चुनाव पर पड़ना तय है। पश्चिम बंगाल में चुनाव चल रहे हैं। ईड़ी के अधिकारी चुनाव कार्य में लगे हुए लोगों को दिल्ली बुलाकर मामले की पूछताछ कर रहे हैं। चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाकर जिस तरह से परिसीमन बिल को महिला आरक्षण बिल के रूप में पेश किया गया। सारी कार्यवाही को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। मतदान के पूर्व टीएमसी और विपक्ष को महिला आरक्षण का विरोधी बताकर भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल और देश में जो आंदोलन और प्रदर्शन किये जा रहे हैं, उससे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का चुनाव प्रभावित होना तय है। जिस तरह की स्थितियां पश्चिम बंगाल के चुनाव में देखने को मिल रही हैँ, उसके बाद राजनीतिक एवं प्रशासनिक हल्कों में चिंता भी देखने को मिल रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार न्यायपालिका के जजों को भी मतदाता सूची की जांच और ट्रिब्यूनल की अपील सुनने में लगा दिया गया है। मतदान के एक दिन पहले तक मतदाता सूची में, मतदाताओं के नाम जोड़ने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। पश्चिम बंगाल में जिस तरह का चुनाव हो रहा है, ऐसा चुनाव भारत और दुनिया में पहली बार दिख रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में जिस तरह से केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका हर जगह पर देखने को मिल रही है, निश्चित रूप से चुनाव के दौरान और चुनाव परिणाम आने के पश्चात इसके दुष्परिणाम बंगाल में देखने को मिलेंगे। इसका सहज अंदाज लगाया जा सकता है। विपक्ष जिस तरह से संसद के अंदर और संसद के बाहर एकजुट होकर आक्रामक हो रहा है। क्रिया की प्रतिक्रिया के फलस्वरुप केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बार फिर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्षी दलों के सांसद जुट गए हैं। आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है, आने वाले दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के साथ ही साथ आम जनता के लिए परेशानी से भरे होंगे। जिस तरह का अविश्वास संवैधानिक संस्थाओं के प्रति बढ़ता जा रहा है, यह कोई अच्छी स्थिति भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नहीं है। वर्तमान स्थिति के कारण चिंता होना स्वाभाविक है। बांग्लादेश के चुनाव में कुछ इस तरह की स्थिति शेख हसीना के समय देखने को मिली थी जिसकी परिणति बहुत खराब हुई। शेख हसीना को जान बचाने के लिए भारत में शरण लेनी पड़ी। बांग्लादेश को कितना नुकसान हुआ है, यह सब ने देख लिया है। यदि इस तरह की स्थितियां पश्चिम बंगाल राज्य में बन रही हैं तो ऐसी स्थिति में चिंता होना स्वाभाविक है। ईएमएस / 20 अप्रैल 26