नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज बी. वी. नागरत्ना ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया से जुड़े कार्यक्रम में न्यायपालिका में जजों के आचरण और ईमानदारी पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार होते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसतरह के जजों को हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद न्यायपालिका में अधिकारियों को पर्याप्त वेतन और बेहतर सेवा शर्तें मिल रही हैं। इसके बाद किसी भी प्रकार का अनैतिक आचरण न केवल अनुचित है बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, एक जज को अपने वैध वेतन में संतुष्ट रहना चाहिए और हर प्रकार के प्रलोभन से दूर रहना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक ईमानदारी, अनुशासन और निष्पक्षता भी शामिल होना चाहिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक भी गलत या लापरवाही से लिया फैसला जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है। साथ ही, उन्होंने अदालतों के प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने पर जोर दिया, विशेषकर जिला स्तर की न्यायपालिका को लेकर ये बात कही। इस मौके पर वरिष्ठ जज नागरत्ना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में वकीलों ने एआई टूल्स द्वारा तैयार किए गए इसतरह के कानूनी संदर्भ प्रस्तुत किए जो वास्तव में मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि वकीलों को जिन फैसलों का वे हवाला देते हैं, उनकी सत्यता की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए। आशीष दुबे / 20 अप्रैल 2026