-एनजीटी वर्तमान में एक स्कूली छात्र की याचिका पर सुनवाई कर रहा नई दिल्ली,(ईएमएस)। नई दिल्ली नगर परिषद ने एनजीटी को बताया है कि उसने सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालकर अस्वच्छता वाली परिस्थितियां पैदा करने वालों के खिलाफ चालान जारी करना शुरू कर दिया है। इस साल जनवरी से अब तक कुल 76 चालान जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही कबूतर चारा डालने वाले प्रमुख स्थानों पर नियमित सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एनजीटी वर्तमान में स्कूली छात्र आरमान पालीवाल की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कबूतरों को चारा डालने और उनकी बढ़ती संख्या के कारण दिल्ली-एनसीआर के कई फुटपाथों, पैदल रास्तों और ट्रैफिक आइलैंड्स पर उनके गोबर फैल जाते हैं। जब इन जगहों को झाड़ा जाता है तो सूखे गोबर के विषैले कण धूल के साथ मिलकर हवा में फैलते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और गंभीर फेफड़ों की बीमारियां हो सकती हैं और सांस लेने में गंभीर तकलीफ होती है। बता दें दिसंबर 2024 में दायर की गई इस याचिका में अवैध विक्रेताओं को हटाने की भी मांग की गई है जो सार्वजनिक जगहों पर कबूतरों को चारा डालते हैं। पिछले साल मई में एनजीटी ने एनडीएमसी समेत संबंधित एजेंसियों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। 9 अप्रैल 2026 को एनडीएमसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्वच्छता पर्यवेक्षण कर्मचारियों द्वारा कबूतर चारा डालने वाले स्थानों का सर्वेक्षण किया गया और अस्वच्छता फैलाने वालों पर नियमित चालान जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लोक स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन स्थानों की हर रोज सफाई की जा रही है। वहीं एनडीएमसी ने बंदरों को खाना खिलाने के खिलाफ भी चालान जारी किए हैं। बंदरों को खाना देने के नुकसान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा बंदर भगाने के लिए विशेष पकड़ने वाले कर्मी तैनात किए गए हैं और खुले स्थानों पर लंगूरों के कट-आउट लगाए गए हैं। एनडीएमसी का कहना है कि इससे पैदा होने वाली अस्वच्छता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखकर जारी रहेगा। सिराज/ईएमएस 20अप्रैल26