ज़रा हटके
21-Apr-2026
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लंदन (ईएमएस)। अमेरिकी सरकार ने जनरल मोटर्स (जीएम) की सीईओ मैरी बैरा और फोर्ड मोटर के सीईओ जिम फार्ले से संपर्क साधा है, ताकि उनकी कंपनियों को युद्ध के लिए हथियार बनाने की अनुमति दी जा सके। यह पहली बार नहीं है कि कार बनाने वाली कंपनियों को ऐसे गंभीर निर्देश दिए गए हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी ऐसा ही एक बड़ा बदलाव देखा गया था। कल्पना कीजिए कि जिन विशाल कारखानों में कभी चमचमाती लग्जरी गाड़ियां बनती थीं, वे अचानक टैंक, बमवर्षक विमान और मशीनगन उगलने लगें। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे देशों में ठीक यही हुआ था। सरकारों ने आपातकालीन आदेश जारी कर दुनिया की सबसे बड़ी कार कंपनियों को आम वाहनों का उत्पादन बंद करने और युद्ध के लिए विनाशकारी हथियार बनाने का निर्देश दिया था। 1939 में युद्ध शुरू होने और विशेष रूप से 1941 में पर्ल हार्बर हमले के बाद इसके भीषण रूप लेने के साथ, मित्र राष्ट्रों और धुरी राष्ट्रों दोनों को रातों-रात लाखों की संख्या में बंदूकों, टैंकों, जीपों और लड़ाकू विमानों की सख्त आवश्यकता महसूस हुई। इतने कम समय में नई हथियार फैक्ट्रियां स्थापित करना असंभव था। साथ ही, युद्ध के कारण स्टील, रबर और ईंधन जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की भारी कमी हो गई, जिन्हें सेना के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसी वजह से अमेरिका और ब्रिटेन जैसी सरकारों ने नागरिकों के लिए निजी कारों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। सरकारों को यह भली-भांति ज्ञात था कि फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी कार कंपनियों के पास असेंबली लाइन तकनीक की अद्भुत महारत थी। जो फैक्ट्रियां एक ही सांचे का उपयोग करके एक दिन में हजारों कारें जोड़ सकती थीं, वे कुछ ही समय में टैंक या हवाई जहाज भी बना सकती थीं। अमेरिका में कारों से हथियारों के इस वृहद परिवर्तन को लोकतंत्र का शस्त्रागार (आर्सेनल ऑफ डेमोक्रेसी) का नाम दिया गया, जो औद्योगिक शक्ति को सैन्य शक्ति में बदलने का एक प्रतीक बन गया। इस दौर में कार कंपनियों ने जो इंजीनियरिंग के चमत्कार दिखाए, वे आज भी विस्मयकारी हैं। फोर्ड ने मिशिगन में विलो रन नाम का एक विशाल प्लांट रातों-रात तैयार किया, जहाँ कारों की जगह बी-24 लिबरेटर बमवर्षक विमान बनने लगे। यह असेंबली लाइन इतनी तेज थी कि हर 63 मिनट में एक पूरा बमवर्षक विमान बनकर उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाता था। जनरल मोटर्स ने ट्रकों, टैंकों और तोपों के गोले बनाकर मित्र राष्ट्रों की सेनाओं को ताकत दी। जर्मनी में हिटलर के आदेश पर फॉक्सवैगन की मशहूर बीटल कार के डिजाइन को सैन्य वाहन कुबेलवैगन (जर्मन जीप) में बदल दिया गया, जबकि पोर्श के संस्थापक ने घातक जर्मन टैंक डिजाइन किए। ब्रिटेन की लग्जरी कार कंपनी रोल्स-रॉयस ने लड़ाकू विमानों के लिए दमदार मर्लिन इंजन बनाए, और जापान में मित्सुबिशी ने खतरनाक ‘ज़ीरो’ लड़ाकू विमानों का निर्माण किया। सुदामा/ईएमएस 21 अप्रैल 2026