राज्य
21-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। फैटी लिवर देश का बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है। बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। खराब खानपान, बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक निष्क्रियता ने इसे ‘साइलेंट किलर’ बना दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि समय रहते जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगेंगे। फैटी लिवर के बढ़ते मामलों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएएमआर) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार भारत में 38 से 40 प्रतिशत वयस्क आबादी इस बीमारी से ग्रसित है, यानी देश का हर तीन में से एक नागरिक इसकी चपेट में है। आइसीएएमआर के आंकड़ों के अनुसार इस समय देश में 30 से 35 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर के जोखिम में हैं, मोटे बच्चों में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक है। दिल्ली की स्थिति और भी गंभीर है। इंस्टीट्यूट आफ लिवर एंड बायिलियरी साइंसेज (आइएलबीएस) के 11 जिलों में छह हजार से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में 18 वर्ष से अधिक आयु वाले 50 से 56 प्रतिशत वयस्कों में फैटी लिवर के लक्षण पाए गए हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/21/ अप्रैल /2026