कांकेर(ईएमएस)। ब्लॉक के लोहत्तर, सोनादई, दमकसा, सुरुंगदोह और घमरे सहित विभिन्न गांवों में अक्ती एवं आमा जोगानी पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने प्रकृति, पूर्वजों और ग्राम देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की। पर्व की शुरुआत पूर्वजों के आह्वान के साथ धूप-दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद चावल, दाल, कच्चा आम (आमा), महुआ फूल और चार प्रकार के फल अर्पित किए गए। ग्रामीणों ने बरगद, पीपल, महुआ और आम जैसे वृक्षों की पूजा कर धरती को जल अर्पित किया। पूजा के बाद एक-दूसरे को तिलक लगाकर जोहार भेंट किया गया। गांवों में पारंपरिक गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य से पूरा वातावरण उत्सवमय रहा। युवा और बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। आदिवासी हल्बा समाज 18 गढ़ महासभा के सचिव राजू नायक ने बताया कि आमा जोगानी पर्व बस्तर संभाग की आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्रकृति और पूर्वजों के प्रति आस्था का प्रतीक है। यह पर्व बैशाख माह में कच्चे आम के आगमन पर मनाया जाता है। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य नए आम को पहले देवी-देवताओं को अर्पित कर प्रकृति से अनुमति लेना है, जिसके बाद ही ग्रामीण आम का सेवन करते हैं। साथ ही यह संदेश भी दिया जाता है कि केवल पके आम ही तोड़े जाएं और कच्चे आमों को संरक्षित किया जाए ताकि उनकी गुठलियों से नए पौधे उग सकें। पर्व के दौरान लोगों ने अच्छी फसल, खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हुए प्रकृति की विधिवत पूजा की। ईएमएस(राकेश गुप्ता)21 अप्रैल 2026